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Amarnath Cloud Burst : मलबे के ढेर और उफनते नाले में जिंदगी की तलाश, कड़ाके की ठंड में जारी है बचाव अभियान

Sun, 10 Jul 2022 12:35 AM IST
विजय पुंडीर ओमपाल संब्याल, जम्मू
ओमपाल संब्याल, जम्मू Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 10 Jul 2022 12:35 AM IST
सार

पवित्र गुफा के सामने सैलाब के साथ आया मलबा रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा बन गया है। रेस्क्यू टीमें अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं। रेस्क्यू टीम मलबे के ढेर और उफनते नाले में जिंदगी की तलाश कर रही है। 

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Amarnath Cloudburst Overnight rescue operation amidst threat of severe cold bad weather
सेना के जवान राहत कार्यों में जुट हुए हैं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कड़ाके की ठंड, घुप अंधेरा और खराब मौसम के खतरे के बीच बचाव अभियान के जवान मलबे का चप्पा-चप्पा खंगाल रहे हैं। सेना, सीआरपीएफ, आईटीबीपी से लेकर तमाम एजेंसियों के जांबाज गैंती-बेलचे से मलबा हटा रहे हैं। कहीं कंबल, बोरी या कुछ सामान मिलने पर जमीन को हाथ से कुरेद रहे हैं। इस उम्मीद में कि कोई जिंदा मिल जाए। लापता अमरनाथ यात्री का शव मिले तो पार्थिव देह को कोई नुकसान न पहुंचे।

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शुक्रवार शाम से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन रात भर जारी रहा। शनिवार तड़के पवित्र गुफा से लेकर पूरे यात्रा मार्ग को श्रद्धालुओं से खाली करवा लिया गया। अब सिर्फ उन जिंदगियों की तलाश है, जिन्हें सैलाब अपने साथ बहा ले गया। मलबा खोदने में जुटे जवानों के अलावा कुछ टीमें उफनते नाले में भी उतरीं। क्योंकि कुछ लोगों के पानी के साथ बहने की आशंका थी। गुफा के पास पानी के साथ आए मलबे की करीब छह फुट मोटी परत जम गई है। सिल्ट सरीखी मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थरों ने उस नाले की जद में आने वाली हर चीज को नीचे दबा दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान मलबे की वजह से हुआ है। पानी सूखते ही कुछ फुट तक जमी मलबे की तह ठोस हो गई है। जितना भी समय लगे, रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
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बीप की आवाज व कुत्तों के भौंकने पर बंधती रही उम्मीद
पवित्र गुफा के सामने सैलाब के साथ आया मलबा रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा बन गया है। रेस्क्यू टीमें अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं डॉग स्क्वायड को भी लगाया गया है। जिंदगी की तलाश में जुटी टीमों को उपकरणों की बीप की आवाज सुनाई देती या फिर कुत्ते कहीं रुककर भौंकने लगते तो रेस्क्यू टीमों को उम्मीद बंध जाती।
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दूर तक फैले हैं तबाही के निशान
बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा के पास बादल फटने से मची तबाही के मंजर के निशान शनिवार को दूसरे दिन भी साफ-साफ दूर-दूर तक फैले हुए नजर आ रहे हैं। हर ओर बडे़-बड़े पत्थर के टुकड़े और चट्टान। यात्रियों के बैग, फोन, टेंट वालों के शामियाने और लंगर वालों का सामान इधर-उधर फैला हुआ है। यों तो बचाव कार्य घटना के फौरन बाद शुरू कर दिया गया था, लेकिन शनिवार को सेना, बीएसएफ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत सभी अर्द्धसैनिक बलों के जवान सुबह चार बजे से ही दोबारा बचाव अभियान में जुट गए। 

प्रधानमंत्री व गृह मंत्रालय कार्यालय के अलावा उप राज्यपाल मनोज सिन्हा भी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। दूसरे दिन पवित्र गुफा तक श्रद्धालुओं को नहीं जाने दिया गया ताकि बचाव कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान न आने पाए और सब कुछ दुरुस्त कर लिया जाए। 

थ्रू वॉल रडार की मदद से पांच लोग निकाले
बचाव कार्य में सुबह से थ्रू वॉल रडार की मदद ली जा रही है। इससे जमीन में कंपन के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि मलबे और पत्थरों के नीचे कोई जिंदगी तो नहीं फंसी हुई है। इसी आधार पर सुरक्षा बलों ने पांच लोगों को जीवित और सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है। पूरा तंत्र राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। सेना की ओर से हस्तचालित (हैंडहेल्ड) थर्मल इमेजर, नाइट विजन डिवाइस से बचाव दल रात के अंधेरे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं।

सीटी बजाकर किया सतर्क, पर पांच मिनट में ही सब तबाह 
चंडीगढ़ के मनीष चौहान अपने चार अन्य साथियों प्रदीप राणा, संगम सिंह, हरदीप राणा व ठाकुर के साथ बाबा भोले के दर्शन के लिए बालटाल के रास्ते शुक्रवार को पवित्र गुफा पहुंचे थे। मनीष ने बताया कि शाम को दर्शन के बाद हम पांचों लोग गुफा के बाहर ही लगे करनाल वालों के लंगर में खाना खाने लगे। खाना खाकर बाहर निकले थे और पांच मिनट का समय ही बीता होगा कि तबाही का उफान शुरू हो गया। उस समय लंगर में 40-50 भक्त और लगभग 20 कारीगर-मजदूर रहे होंगे। देखते ही देखते पूरा लंगर बह गया। किसी को बचने तक का मौका नहीं मिला। आशंका जताई कि इस लंगर में रहने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बताया कि सीआरपीएफ के एक जवान ने एक महिला को तो बचा लिया लेकिन लगभग 22 साल की बेटी को नहीं बचाया जा सका। मनीष के साथी प्रदीप और हरदीप ने बताया कि गुफा के बगल से चूने के रंग का गाद और मलबा तेज बहाव के साथ नीचे आने लगा। पूरा मलबा हेलीपैड तक पसर गया है। वहां तैनात जवानों ने सीटी बजाकर तथा शोर मचाकर लोगों को सचेत किया तब जाकर कई जानें बच सकीं। कुछ लोगों ने नीचे भागकर तो कईयों ने ऊपर की ओऱ भागकर जान बचाई।

प्रशासन के बेहतर प्रबंध, पंजतरणी में टेंट किया मुफ्त 
चंडीगढ़ निवासी मनीष, संगम सिंह और ठाकुर ने बताया कि सुरक्षा बलों ने सभी भक्तों को रात में पंजतरणी भेज दिया। यहां प्रशासन ने बेहतरीन प्रबंध कर रखे थे। लंगर तथा निजी टेंट वालों ने भी जी खोलकर यात्रियों का आतिथ्य किया। उन्होंने बताया कि पंजतरणी में सभी लंगर मुफ्त कर दिए गए थे। टेंट वालों ने कई यात्रियों जिनके बैग वगैरह बह गए थे उनके लिए कपड़े का बंदोबस्त किया। कइयों के फोन भी छूट गए थे। 

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