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26 साल पुराने गबन के मामले में दोषी को सजा
Updated Tue, 21 Nov 2017 01:02 AM IST
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कठुआ। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कठुआ सिकंदर आजम चौधरी ने सोमवार को 26 साल पुराने 11 लाख 30 हजार रुपये के गबन के मामले का निपटारा कर दिया। साथ ही इस मामले में दोषी को चार अलग अलग सेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 01/1991 के तहत सजा सुनाई है।
सहायक सरकारी अभियोजक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दस जनवरी 1991 को बसोहली पुलिस को एक पत्र मिला। इसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि जम्मू सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक बसोहली के तत्कालीन सहायक ब्रांच मैनेजर कुलदीप सिंह संब्याल निवासी बाड़ा तहसील सांबा वर्तमान निवासी शास्त्री नगर कठुआ पर बैंक अकाउंट को नियमित रूप से मेंटेंन करने की जिम्मेदारी बताई गई।
शिकायत में बताया गया कि कुलदीप कठुआ ब्रांच से कैश निकालकर बसोहली ब्रांच की कैश जरूरतों को पूरा करने का काम किया करता था। यह उसकी जिम्मेदारी थी कि निकाली गई राशि की सही इंट्री संबंधित रजिस्टर में की जाती। उसकी यह जिम्मेदारी थी कि खातों की स्टेटमेंट को पुनर्मिलाप के लिए हैड आफिस में भी नियमित रूप से भेजता, लेकिन इस दौरान अनियमितताएं पाई गईं।
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आरोप था कि उसने रिकार्ड से गुप्त अभिप्राय के साथ छेड़छाड़ की। पुलिस ने आरपीसी की धारा 409/420/467/471 के तहत मामला दर्ज कर अलग अलग चालान पेश किए। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कठुआ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्य के आधार पर कुलदीप सिंह संब्याल को एफआईआर संख्या 1/1991 में दर्ज चार अलग अलग मामलों में आरपीसी की धारा 409 के तहत पांच साल के कठोर कारावास, आरपीसी की धारा 467 में पांच साल के कठोर कारावास और हर दोष के लिए पांच हजार का जुर्माना भी सुनाया है।
जुर्माना न दिए जाने की स्थिति में सभी दोषों में तीन महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई है। दोनों अपराधों में कारावास एक साथ चलेंगे। मामले में अभियोजन पक्ष से सहायक सरकारी अभियोजक देवेंद्र शर्मा और बचाव पक्ष की ओर से एस के सांगड़ा शामिल रहेे।
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सहायक सरकारी अभियोजक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दस जनवरी 1991 को बसोहली पुलिस को एक पत्र मिला। इसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि जम्मू सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक बसोहली के तत्कालीन सहायक ब्रांच मैनेजर कुलदीप सिंह संब्याल निवासी बाड़ा तहसील सांबा वर्तमान निवासी शास्त्री नगर कठुआ पर बैंक अकाउंट को नियमित रूप से मेंटेंन करने की जिम्मेदारी बताई गई।
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शिकायत में बताया गया कि कुलदीप कठुआ ब्रांच से कैश निकालकर बसोहली ब्रांच की कैश जरूरतों को पूरा करने का काम किया करता था। यह उसकी जिम्मेदारी थी कि निकाली गई राशि की सही इंट्री संबंधित रजिस्टर में की जाती। उसकी यह जिम्मेदारी थी कि खातों की स्टेटमेंट को पुनर्मिलाप के लिए हैड आफिस में भी नियमित रूप से भेजता, लेकिन इस दौरान अनियमितताएं पाई गईं।
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आरोप था कि उसने रिकार्ड से गुप्त अभिप्राय के साथ छेड़छाड़ की। पुलिस ने आरपीसी की धारा 409/420/467/471 के तहत मामला दर्ज कर अलग अलग चालान पेश किए। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कठुआ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्य के आधार पर कुलदीप सिंह संब्याल को एफआईआर संख्या 1/1991 में दर्ज चार अलग अलग मामलों में आरपीसी की धारा 409 के तहत पांच साल के कठोर कारावास, आरपीसी की धारा 467 में पांच साल के कठोर कारावास और हर दोष के लिए पांच हजार का जुर्माना भी सुनाया है।
जुर्माना न दिए जाने की स्थिति में सभी दोषों में तीन महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई है। दोनों अपराधों में कारावास एक साथ चलेंगे। मामले में अभियोजन पक्ष से सहायक सरकारी अभियोजक देवेंद्र शर्मा और बचाव पक्ष की ओर से एस के सांगड़ा शामिल रहेे।