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अलगाववादियों को वार्ता के लिए मनाएंगे दिनेश् वर के दूत
Updated Sun, 12 Nov 2017 02:02 AM IST
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राघवेंद्र नारायण मिश्र
जम्मू। केंद्र के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा को कश्मीर के पहले दौरे में यह आभास हो गया लगता है कि अलगाववादियों से बातचीत के बगैर बात नहीं बनेगी। लिहाजा अब अलगाववादियों को वार्ता की मेज तक लाने की पहल शुरू हो गई है। वार्ताकार का अगला दौरा दिसंबर में संभावित है। उससे पहले अलगाववादियों से बातचीत के लिए दूतों को सक्रिय करने की रणनीति बनी है। योजना के तहत दिनेश्वर से वार्ता से पहले इन दूतों से अलगाववादियों की बातचीत होगी। पेचीदे मसलों पर सहमति का फार्मूला तलाशने के बाद वार्ताकार और अलगाववादी रूबरू हो सकते हैं।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दूत की भूमिका के लिए दो निर्दलीय विधायकों से संपर्क किया गया है। इस काम में एक-दो अवकाश प्राप्त अफसरों की भूमिका भी तय करने की कोशिश शुरू हुई है। वार्ताकार दिल्ली लौट चुके हैं। दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के पहले वार्ताकार की मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मंत्रणा होगी। मंत्रालय के अतिरिक्त गृह सचिव बीआर शर्मा जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव रह चुके हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता अशोक प्रसाद रियासत के डीजीपी रहे हैं। वार्ताकार के पांच दिनों के दौरे में हुई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के क्रम में उभरकर सामने आए मुद्दों पर मंथन के बाद अगली रणनीति होगी।
सूत्रों का कहना है कि टेरर फंडिंग में एनआईए की जारी जांच को कुछ समय के लिए स्थगित किया जा सकता है। अलगाववादी एनआईए जांच को दवाब की रणनीति का हिस्सा मानते हैं। बातचीत के लिए माहौल बनाने की रणनीति के तहत अलगाववादियों को कुछ राहत दी जा सकती है। इस बीच आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन आल आउट जारी रहेगा। केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवादियों के खिलाफ अभियान पर वार्ता की कोशिशों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
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इस बार अलगाववादी एकजुट हैं। सौयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासिन मलिक का संयुक्त मोर्चा मंत्रणा के बाद संयुक्त रूप से फैसले लेता है। लिहाजा किसी एक गुट से बातचीत की कोशिश की सफलता पर संदेह है। पहले मीरवाइज से वार्ता की कोशिश शुरू की गई थी लेकिन वह अकेले बातचीत के लिए तैयार नहीं हुए। फिलहाल वार्ताकार के पहले दौरे में कश्मीर मसले के हल का कोई सूत्र नहीं मिल पाया। कश्मीर में अलगाववादियों समेत प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने वार्ताकार से दूरी बनाए रखी। इसलिए अगले दौरे में अलगाववादियों से वार्ता के लिए माहौल बनाने की कवायद तेज हो रही है।
जम्मू। केंद्र के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा को कश्मीर के पहले दौरे में यह आभास हो गया लगता है कि अलगाववादियों से बातचीत के बगैर बात नहीं बनेगी। लिहाजा अब अलगाववादियों को वार्ता की मेज तक लाने की पहल शुरू हो गई है। वार्ताकार का अगला दौरा दिसंबर में संभावित है। उससे पहले अलगाववादियों से बातचीत के लिए दूतों को सक्रिय करने की रणनीति बनी है। योजना के तहत दिनेश्वर से वार्ता से पहले इन दूतों से अलगाववादियों की बातचीत होगी। पेचीदे मसलों पर सहमति का फार्मूला तलाशने के बाद वार्ताकार और अलगाववादी रूबरू हो सकते हैं।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दूत की भूमिका के लिए दो निर्दलीय विधायकों से संपर्क किया गया है। इस काम में एक-दो अवकाश प्राप्त अफसरों की भूमिका भी तय करने की कोशिश शुरू हुई है। वार्ताकार दिल्ली लौट चुके हैं। दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के पहले वार्ताकार की मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मंत्रणा होगी। मंत्रालय के अतिरिक्त गृह सचिव बीआर शर्मा जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव रह चुके हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता अशोक प्रसाद रियासत के डीजीपी रहे हैं। वार्ताकार के पांच दिनों के दौरे में हुई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के क्रम में उभरकर सामने आए मुद्दों पर मंथन के बाद अगली रणनीति होगी।
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सूत्रों का कहना है कि टेरर फंडिंग में एनआईए की जारी जांच को कुछ समय के लिए स्थगित किया जा सकता है। अलगाववादी एनआईए जांच को दवाब की रणनीति का हिस्सा मानते हैं। बातचीत के लिए माहौल बनाने की रणनीति के तहत अलगाववादियों को कुछ राहत दी जा सकती है। इस बीच आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन आल आउट जारी रहेगा। केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवादियों के खिलाफ अभियान पर वार्ता की कोशिशों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
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इस बार अलगाववादी एकजुट हैं। सौयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासिन मलिक का संयुक्त मोर्चा मंत्रणा के बाद संयुक्त रूप से फैसले लेता है। लिहाजा किसी एक गुट से बातचीत की कोशिश की सफलता पर संदेह है। पहले मीरवाइज से वार्ता की कोशिश शुरू की गई थी लेकिन वह अकेले बातचीत के लिए तैयार नहीं हुए। फिलहाल वार्ताकार के पहले दौरे में कश्मीर मसले के हल का कोई सूत्र नहीं मिल पाया। कश्मीर में अलगाववादियों समेत प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने वार्ताकार से दूरी बनाए रखी। इसलिए अगले दौरे में अलगाववादियों से वार्ता के लिए माहौल बनाने की कवायद तेज हो रही है।