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बिजली के मामलों को निपटाना टेढ़ी खीर
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:18 AM IST
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कठुआ। जिले में बिजली से जुड़े न्यायिक मामलों को निपटाने के लिए अदालत की दूरी रियासत के एक छोर से दूसरे छोर तक है। सुनने में भले ही हैरानी हो लेकिन कठुआ जिले के बिजली विभाग के मोबाइल मजिस्ट्रेट पुंछ जिले के सूरनकोट में बैठते हैं। यानि बिजली विभाग को यदि चालान पेश करना हो या फिर उपभोक्ता को अदालत में पेश होना हो दोनों काम के लिए सूरनकोट जाना पड़ता है। सड़क मार्ग से यह दूरी कठुआ जिला मुख्यालय से लगभग तीन सौ किलोमीटर की है और यदि बनी के किसी मामले को बिजली मामले के मजिस्ट्रेट के यहां पेश होना हो तो फासला एक तरफा बढ़कर लगभग पांच सौ किलोमीटर हो जाता है। दिलचस्प यह है कि जम्मू और सांबा जिले के मोबाइल मजिस्ट्रेट की सुविधा जम्मू जिले में ही है जबकि कठुआ के ही मामले सूरनकोट जाते हैं। बिजली विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में जम्मू एक ही सर्किल हुआ करता था। लिहाजा राजौरी, पुंछ और कठुआ आपस में जुडे़ हुए थे। वर्तमान में उधमपुर, रामबन, डोडा, किश्तवाड़ सहित अन्य इलाकों को बटोत, जम्मू या सटे इलाकों की अदालतों के साथ जोड़ा गया है। लेकिन कठुआ जिला आज भी अलग होने के बावजूद सूरनकोट से ही जुड़ा है। ऐसा तब है जब बिजली मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री जिला कठुआ से ही हैं। मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत दूर होने के कारण विभाग भी नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से परहेज करता रहा है। यदि मामला दर्ज करवाया जाए तो सूरनकोट जाना मजबूरी बन जाता है। ऐसे में विभाग और उपभोक्ता दोनों के लिए मुसीबत बन जाती है। अधीक्षण अभियंता संदीप सेठ ने कहा कि इस मामले में उच्चाधिकारी को लिखा गया है।
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