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लाठी से नहीं कोई डर, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
Updated Thu, 28 Dec 2017 01:33 AM IST
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कठुआ। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। कर्मचारियों ने पिछले दिन जम्मू में हुए लाठीचार्ज का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें उनका हक चाहिए। इसके लिए सरकार चाहे जितनी बार उन पर लाठियां बरसाए, लेकिन वे अपना हक लेकर ही मानेंगे।
जिला अस्पताल में धरना-प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार की निंदा करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है और दूसरी तरफ महिलाओं पर लाठीचार्ज करती है। यह कहां का इंसाफ है। इस प्रकार के कदम से उनकी हिम्मत को नहीं तोड़ा जा सकता है। मंत्री अगर अपनी तरफ से सच्चे और ईमानदार हैं तो वह क्यों उनके बीच में आकर बात नहीं करते। केवल मीडिया को ही उन्होंने सहारा क्यों बना कर रखा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह अपने हड़ताल वापस नहीं लेंगे जब तक उनका हक नहीं मिल जाता। उधर जिला अस्पताल में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अस्पताल के कामकाज पर प्रभाव पड़ा। डिस्पेंसरी खाली पड़ी दिखी तो वहीं विभिन्न कोर्स करने आए विद्यार्थी ही काम करते नजर आए। गौरतलब है जिला अस्पताल में पहले ही स्टाफ की कमी है और पचास प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। उस पर एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्थिति और बिगड़ गई है।
अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित
बसोहली। अपनी मांगों के लिए एनएचआरएम कर्मियों की हड़ताल जारी है। वे रेगुलर करने की मांग को लेकर हड़ताल पर डटे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया है। बीएमओ बसोहली डाक्टर नीरज नागपाल ने बताया कि बसोहली उपजिला अस्पताल में लगभग 20 एनएचआरएम कर्मी काम कर रहे हैं, जो उपजिला अस्पताल में लगभग सभी कामों को देखते हैं। उनके हड़ताल पर चले जाने से उपजिला चिकित्सालय में सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। स्टाफ की कमी के चलते चिकित्सालय में मात्र तीन डाक्टरों के सहारे काम चल रहा है, जो बेहद मुश्किल है। एनएचआरएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से बुधवार को अस्पताल में अफरातफरी का माहौल बना रहा। मरीज परेशानी में इधर-उधर भटकते रहे। कुछ मरीजों को ही उपचार मिल सका, जबकि बड़ी तादाद में मरीज बिना उपचार के ही लौट गए। ब्यूरो
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जिला अस्पताल में धरना-प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार की निंदा करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है और दूसरी तरफ महिलाओं पर लाठीचार्ज करती है। यह कहां का इंसाफ है। इस प्रकार के कदम से उनकी हिम्मत को नहीं तोड़ा जा सकता है। मंत्री अगर अपनी तरफ से सच्चे और ईमानदार हैं तो वह क्यों उनके बीच में आकर बात नहीं करते। केवल मीडिया को ही उन्होंने सहारा क्यों बना कर रखा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह अपने हड़ताल वापस नहीं लेंगे जब तक उनका हक नहीं मिल जाता। उधर जिला अस्पताल में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अस्पताल के कामकाज पर प्रभाव पड़ा। डिस्पेंसरी खाली पड़ी दिखी तो वहीं विभिन्न कोर्स करने आए विद्यार्थी ही काम करते नजर आए। गौरतलब है जिला अस्पताल में पहले ही स्टाफ की कमी है और पचास प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। उस पर एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्थिति और बिगड़ गई है।
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अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित
बसोहली। अपनी मांगों के लिए एनएचआरएम कर्मियों की हड़ताल जारी है। वे रेगुलर करने की मांग को लेकर हड़ताल पर डटे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया है। बीएमओ बसोहली डाक्टर नीरज नागपाल ने बताया कि बसोहली उपजिला अस्पताल में लगभग 20 एनएचआरएम कर्मी काम कर रहे हैं, जो उपजिला अस्पताल में लगभग सभी कामों को देखते हैं। उनके हड़ताल पर चले जाने से उपजिला चिकित्सालय में सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। स्टाफ की कमी के चलते चिकित्सालय में मात्र तीन डाक्टरों के सहारे काम चल रहा है, जो बेहद मुश्किल है। एनएचआरएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से बुधवार को अस्पताल में अफरातफरी का माहौल बना रहा। मरीज परेशानी में इधर-उधर भटकते रहे। कुछ मरीजों को ही उपचार मिल सका, जबकि बड़ी तादाद में मरीज बिना उपचार के ही लौट गए। ब्यूरो
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