ग्रिल और फाइबर सीट से कवर था वीरेंद्र दीक्षित का घर, नेपाली लड़की का था आना जाना
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बाबा वीरेंद्र दीक्षित ने भगवती नगर स्थित जिस मकान को केंद्र चलाने के लिए लिया है, उसे अपने पैसे से कवर किया है। बाबा ने खुद के खर्च से मकान के बाहरी हिस्से को लोहे की ग्रिल और फाइबर शीट से कवर कराया था।
ऊपरी छत देखते ही मकान को पसंद कर लिया गया था। वहीं मकान मालिक मुकेश का कहना है कि वर्ष 2014 में पहली बार बाबा वीरेंद्र दीक्षित उसके घर आया था। उसने जब मकान दिया था तो उसे क्या पता था कि आगे क्या होगा।
सोमवार को कैनाल रोड पुलिस बाबा के केंद्र में पहुंची और वहां रहने वाली दो महिलाओं से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि मकान में सेक्स रैकेट जैसा कुछ चलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
महिलाओं के पास 11 साल का रेंट एग्रीमेंट है, जिस पर मकान मालिक ने खुद हस्ताक्षर किए हुए हैं। यदि मकान खाली कराना है तो इसमें कोर्ट का आदेश होना जरूरी है। घर के मालिक मुकेश ने बताया कि बाबा वीरेंद्र दीक्षित जम्मू स्थित अपने मकान में 2015 में अंतिम बार आया था।
किसी नेपाली लड़की का था घर में आना-जाना
घर के मालिक मुकेश ने बताया कि बाबा के किरायें के मकान में किसी नेपाली नाबालिग लड़की का खूब आना जाना होता था। मुकेश के मुताबिक एक बार तो वह लड़की उस मकान में रहने के लिए भी आ गई थी।
लेकिन केंद्र में रहने वाली महिलाएं उसके साथ मार पीट करती किया करती थी जिसके चलते बाबा लड़की को अपने साथ ले गया। मुकेश का कहना है कि घर में आठ से दस लड़के-लड़कियां आते-जाते रहते हैं। ऐसे में क्या होता होगा, कोई भी समझ सकता है।