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'बाएं हाथ की अंगुली' से की अनोखी ओपन हार्ट सर्जरी, जाएगी गिनीज बुक में भी!
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 12 Jun 2017 08:23 PM IST
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अस्पताल में भर्ती मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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सवाई मानसिंह अस्पताल में एक ऐसी ओपन हार्ट सर्जरी की गई है, जो संभवतया दुनिया में अपनी तरह की पहली सर्जरी है। चिकित्सकों का दावा है कि यह पहली सर्जरी है जब नई तकनीक के जरिए धड़कते हुए दिल के अंदर की तरफ सर्जरी की गई है। इसमें सर्जन ने अपने बाएं हाथ की एक अंगुली का खास इस्तेमाल भी किया है।
एसएमएस अस्पताल के कार्डियक थोरोसिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. अनिल शर्मा नई तकनीक के जरिए तीन सेंटीमीटर के हर्ट के छेद को बंद कर दिया है। जानकारी के मुताबिक करौली के रहने वाले 35 साल के बबलू को बचपन से दिल में छेद की परेशानी थी। इससे उसके दिल को धड़कने और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। धीरे-धीरे उसके हृदय का आकार भी बढ़ रहा था। बबलू के लीवर में भी सूजन आ गई थी, जिसकी वजह से खाना खाते ही उसका पेट फूल जाता था। दिन ब दिन बिगड़ती स्थिति के चलते उसकी जान को भी खतरा बन गया था।
चिकित्सकों ने बताया कि हृदय का काम रक्त को पूरे शरीर में पहुंचाना और शरीर से रक्त लेकर शुद्ध होने के लिए लंग्स तक पहुंचाना होता है। इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी समस्या लगातार आते हुए इस रक्त को नियंत्रित करना था।
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इसमें एक चुनौती ऑपरेशन के साथ मरीज के दिल के साथ ही ब्रेन, किडनी और लीवर को किसी भी नुकसान से बचाने की थी। ऑपरेशन में तीसरी बड़ी समस्या मरीज के रक्त को किसी तरह से सुरक्षित रख वापस चढ़ाने की थी।
इस सर्जरी को खास तकनीक की मदद से किया गया। इसमें मरीज की sternotomy करने के बाद मरीज के right atrium को हार्ट की झिल्ली से एक pericardial crown बनाकर धड़कते दिल को खोला गया। उसके बाद सर्जन ने अपने बाएं हाथ की अंगुली को right atrium के अंदर डालकर धड़कते हुए दिल के छेद को नापा व उसके साथ ही उसकी आंतरिक संरचना का जायजा लिया। इसके साथ ही उसके दिल का छेद सही कर दिया गया।
चिकित्सकों के अनुसार इस तकनीक के साथ सर्जरी के अन्य फायदे भी हैं। जानकारी के मुताबिक अब इस तरह मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी मात्र पांच से आठ हजार रुपए में हो सकेगी, अब तक एसएमएस अस्पताल में यह पचास हजार रुपए में होती थी। इसमें अधिक ब्लड चढ़ाने व हार्ट लंग मशीन की जरूरत भी नहीं होगी।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल ने बताया कि डॉ. अनिल शर्मा दुनिया के अकेले डॉक्टर हैं जो छोटे चीरे से करीब करीब सभी तरह के ओपन हार्ट ऑपरेशन हो कर चुके हैं। अग्रवाल ने बताया कि इस सर्जरी को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए भी भेजा जाएगा।
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एसएमएस अस्पताल के कार्डियक थोरोसिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. अनिल शर्मा नई तकनीक के जरिए तीन सेंटीमीटर के हर्ट के छेद को बंद कर दिया है। जानकारी के मुताबिक करौली के रहने वाले 35 साल के बबलू को बचपन से दिल में छेद की परेशानी थी। इससे उसके दिल को धड़कने और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। धीरे-धीरे उसके हृदय का आकार भी बढ़ रहा था। बबलू के लीवर में भी सूजन आ गई थी, जिसकी वजह से खाना खाते ही उसका पेट फूल जाता था। दिन ब दिन बिगड़ती स्थिति के चलते उसकी जान को भी खतरा बन गया था।
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चिकित्सकों ने बताया कि हृदय का काम रक्त को पूरे शरीर में पहुंचाना और शरीर से रक्त लेकर शुद्ध होने के लिए लंग्स तक पहुंचाना होता है। इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी समस्या लगातार आते हुए इस रक्त को नियंत्रित करना था।
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इसमें एक चुनौती ऑपरेशन के साथ मरीज के दिल के साथ ही ब्रेन, किडनी और लीवर को किसी भी नुकसान से बचाने की थी। ऑपरेशन में तीसरी बड़ी समस्या मरीज के रक्त को किसी तरह से सुरक्षित रख वापस चढ़ाने की थी।
इस सर्जरी को खास तकनीक की मदद से किया गया। इसमें मरीज की sternotomy करने के बाद मरीज के right atrium को हार्ट की झिल्ली से एक pericardial crown बनाकर धड़कते दिल को खोला गया। उसके बाद सर्जन ने अपने बाएं हाथ की अंगुली को right atrium के अंदर डालकर धड़कते हुए दिल के छेद को नापा व उसके साथ ही उसकी आंतरिक संरचना का जायजा लिया। इसके साथ ही उसके दिल का छेद सही कर दिया गया।
चिकित्सकों के अनुसार इस तकनीक के साथ सर्जरी के अन्य फायदे भी हैं। जानकारी के मुताबिक अब इस तरह मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी मात्र पांच से आठ हजार रुपए में हो सकेगी, अब तक एसएमएस अस्पताल में यह पचास हजार रुपए में होती थी। इसमें अधिक ब्लड चढ़ाने व हार्ट लंग मशीन की जरूरत भी नहीं होगी।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल ने बताया कि डॉ. अनिल शर्मा दुनिया के अकेले डॉक्टर हैं जो छोटे चीरे से करीब करीब सभी तरह के ओपन हार्ट ऑपरेशन हो कर चुके हैं। अग्रवाल ने बताया कि इस सर्जरी को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए भी भेजा जाएगा।