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राजस्थान विधानसभा में पास हुआ ये बिल, 21 से 26 प्रतिशत हुआ ओबीसी आरक्षण
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 26 Oct 2017 06:59 PM IST
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rajasthan assembly
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राजस्थान की विधानसभा में आज अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का बिल पास हो गया। अब यहां ओबीसी आरक्षण कोटा 21 से बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया है।
राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार ने आज राजस्थान विधानसभा में ओबीसी आरक्षण बिल को पारित कर दिया। इसके बाद यहां गुर्जर सहित अन्य 5 जातियों को भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा। वहीं, अब ओबीसी आरक्षण कोटा भी 21 से बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, अभी यह बिल लागू नहीं हुआ है क्योंकि इस पर अभी राज्यपाल की मंजूरी मिलना बाकी है। बताया जा रहा है कि गुर्जरों के साथ ही अन्य पांच जातियों को आरक्षण का लाभ देने के लिए ये बिल सरकार लेकर आई है। ऐसा राजस्थान में चौथी बार हुआ है कि सरकार ये बिल लेकर आई है।
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राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार ने आज राजस्थान विधानसभा में ओबीसी आरक्षण बिल को पारित कर दिया। इसके बाद यहां गुर्जर सहित अन्य 5 जातियों को भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा। वहीं, अब ओबीसी आरक्षण कोटा भी 21 से बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, अभी यह बिल लागू नहीं हुआ है क्योंकि इस पर अभी राज्यपाल की मंजूरी मिलना बाकी है। बताया जा रहा है कि गुर्जरों के साथ ही अन्य पांच जातियों को आरक्षण का लाभ देने के लिए ये बिल सरकार लेकर आई है। ऐसा राजस्थान में चौथी बार हुआ है कि सरकार ये बिल लेकर आई है।
कोर्ट में फंसने के हैं आसार
राजस्थान विधानसभा
पहले भी कई बार ऐसा बिल खारिज हो चुका है। ये बिल दो कैटेगरी में बंटा हुआ है। पहली में 21 प्रतिशत पहले की तरह ही रखा गया है और दूसरी कैटेगरी में गुर्जर सहित अन्य पांच जातियों को 5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
अभी वर्तमान में राजस्थान राज्य में अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 12 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। ऐसे में यह आरक्षण कुल मिलाकर 49 प्रतिशत है। वहीं, आज पारित बिल के मुताबिक गुर्जर सहित अन्य पांच जातियों को 5 प्रतिशत अलग से आरक्षण देने पर आरक्षण की ये सीमा बढ़कर 54 प्रतिशत हो जाती है। ऐसे में इस विधेयक के कोर्ट में फंसने के पूरे आसार बने हुए हैं।
अभी वर्तमान में राजस्थान राज्य में अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 12 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। ऐसे में यह आरक्षण कुल मिलाकर 49 प्रतिशत है। वहीं, आज पारित बिल के मुताबिक गुर्जर सहित अन्य पांच जातियों को 5 प्रतिशत अलग से आरक्षण देने पर आरक्षण की ये सीमा बढ़कर 54 प्रतिशत हो जाती है। ऐसे में इस विधेयक के कोर्ट में फंसने के पूरे आसार बने हुए हैं।