{"_id":"599ed7684f1c1b2d378b474e","slug":"the-ban-on-the-order-of-the-revenue-board","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेवन्यू बोर्ड के आदेश पर लगाई रोक, ये है मामला ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेवन्यू बोर्ड के आदेश पर लगाई रोक, ये है मामला
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 24 Aug 2017 07:11 PM IST
विज्ञापन
Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान हाईकोर्ट ने रींगस के पास मंदिर माफी की जमीन से जुड़े मामले में रेवन्यू बोर्ड के आदेश की क्रियान्विती पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने आदेश की कॉपी रेवन्यू बोर्ड के चेयरमैन को भेजते हुए कहा है कि प्रकरण को 34 साल बाद बोर्ड के समक्ष उठाया गया है, लेकिन बोर्ड ने प्रकरण की सुनवाई में देरी का उल्लेख तक नहीं किया।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता धमेन्द्र पारीक ने अदालत को बताया कि रींगस के पास स्थित करीब तीस बीघा भूमि को 21 दिसंबर 1981 को भूप्रबंध अधिकारी ने मंदिर माफी के नाम दर्ज की। वहीं गुलाब देवी व अन्य ने भू-राजस्व अधिनियम की धारा 9 के तहत सीधे रेवन्यू बोर्ड में प्रार्थना पत्र दायर कर भूमि को निजी खातेदारी में दर्ज करने की गुहार की। जिसे रेवन्यू बोर्ड के सदस्य ने जनवरी 2015 में स्वीकार करते हुए जिला प्रशासन को आदेश दिए कि वह भूमि को गुलाब देवी व उसके वारिसों के पक्ष में दर्ज करे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
विज्ञापन
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता धमेन्द्र पारीक ने अदालत को बताया कि रींगस के पास स्थित करीब तीस बीघा भूमि को 21 दिसंबर 1981 को भूप्रबंध अधिकारी ने मंदिर माफी के नाम दर्ज की। वहीं गुलाब देवी व अन्य ने भू-राजस्व अधिनियम की धारा 9 के तहत सीधे रेवन्यू बोर्ड में प्रार्थना पत्र दायर कर भूमि को निजी खातेदारी में दर्ज करने की गुहार की। जिसे रेवन्यू बोर्ड के सदस्य ने जनवरी 2015 में स्वीकार करते हुए जिला प्रशासन को आदेश दिए कि वह भूमि को गुलाब देवी व उसके वारिसों के पक्ष में दर्ज करे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
विज्ञापन