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प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, इन शहरों में पड़ सकती है बौछारें
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 11 Sep 2017 04:49 PM IST
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लंबे समय से मानसून की बेरुखी झेल रहे प्रदेशवासियों के लिए एकबार फिर से राहत की बूंदे पड़ सकती है।
जानकारी के अनुसार मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि इस सप्ताह उत्तर पूर्वी राजस्थान के कुछ शहरों में बारिश हो सकती है। बताया गया है कि राजधानी जयपुर समेत भरतपुर,करौली,अलवर,सीकर और अजमेर में बारिश होने की संभावनाएं हैं।
मौसम की भविष्यवाणी करने वाली संस्था स्काईमेटवैदर के अनुसार जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ बनने से उत्तर भारत समेत राजस्थान के उत्तर पूर्वी हिस्सो में अगले 24 घंटो में बारिश होने की संभावना जताई है।
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जानकारी के अनुसार मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि इस सप्ताह उत्तर पूर्वी राजस्थान के कुछ शहरों में बारिश हो सकती है। बताया गया है कि राजधानी जयपुर समेत भरतपुर,करौली,अलवर,सीकर और अजमेर में बारिश होने की संभावनाएं हैं।
मौसम की भविष्यवाणी करने वाली संस्था स्काईमेटवैदर के अनुसार जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ बनने से उत्तर भारत समेत राजस्थान के उत्तर पूर्वी हिस्सो में अगले 24 घंटो में बारिश होने की संभावना जताई है।
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अभी ऐसी है मानसून की स्थिती
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गौरतलब है कि इस बार राजस्थान में मानसून का प्रदर्शन फीका ही रहा है जहां प्रदेश के चार जिलों में बाढ़ आई मगर अभी 10 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से भी कम बारिश हुई है।
मानसून की बेरुखी का असर ऐसा है कि प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में लोग उमस भरी गर्मी से बुरी तरह से परेशान है वहीं रात के तापमान में भी एकाएक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मौसम से जुड़ी एजेंसियों का मानना है कि मानसून का तंत्र एक बार फिर से जोर पकड़ेगा क्योंकि इस समय मानसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई वाले क्षेत्रों से होकर गुजर रही है जिसमें एक रेखा उत्तर-दक्षिण टर्फ रेखा उप हिमालय पश्चिम बंगाल और गंगीय पश्चिम बंगाल से होते हुए आंतरिक ओडिशा तक बनी हुई है वहीं दूसरी रेखा उत्तरी कोंकण और गोवा से आंतरिक कर्नाटक से गुजर रही है।
मानसून की बेरुखी का असर ऐसा है कि प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में लोग उमस भरी गर्मी से बुरी तरह से परेशान है वहीं रात के तापमान में भी एकाएक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मौसम से जुड़ी एजेंसियों का मानना है कि मानसून का तंत्र एक बार फिर से जोर पकड़ेगा क्योंकि इस समय मानसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई वाले क्षेत्रों से होकर गुजर रही है जिसमें एक रेखा उत्तर-दक्षिण टर्फ रेखा उप हिमालय पश्चिम बंगाल और गंगीय पश्चिम बंगाल से होते हुए आंतरिक ओडिशा तक बनी हुई है वहीं दूसरी रेखा उत्तरी कोंकण और गोवा से आंतरिक कर्नाटक से गुजर रही है।