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रणथंभौर में फुल डे सफारी का स्टैंडिंग कमेटी ने किया विरोध, कहा 'पैसों के लिए है ये माजरा'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 25 Nov 2017 05:41 PM IST
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फाइल फोटो
रणथंभौर नेशनल पार्क में वन विभाग की ओर से 'फुल डे सफारी' चालू करने का विरोध शुरू हो गया है। इस मुद्दे के लेकर आज वन विभाग और रणथंभौर मामले की स्टैंडिंग कमेटी आमने—सामने हो गई।
सवाईमाधोपुर की जिला कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस बैठक में स्टैंडिंग कमेटी सदस्य अंजना गुसाई ने रणथंभौर में फुल डे सफारी का पुरजोर विरोध किया। इस दौरान वन विभाग पर वन्यजीव संरक्षण की बजाय वन और वन्यजीवों से कमाई पर ज्यादा ध्यान दिए जाने का गंभीर आरोप लगाया।
स्टैंडिंग कमेटी ने वन विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वो सिर्फ पैसों के लिए ऐसे फैसले ले रहे हैं। कमेटी का कहना है कि रणथंभौर नेशनल पार्क में फुल डे सफारी वन्यजीवों के लिए खतरनाक है। इससे जंगल में इंसानी दखल बढ़ेगा। खासकर बाघों की प्राइवेसी पर असर पड़ेगा।
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सवाईमाधोपुर की जिला कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस बैठक में स्टैंडिंग कमेटी सदस्य अंजना गुसाई ने रणथंभौर में फुल डे सफारी का पुरजोर विरोध किया। इस दौरान वन विभाग पर वन्यजीव संरक्षण की बजाय वन और वन्यजीवों से कमाई पर ज्यादा ध्यान दिए जाने का गंभीर आरोप लगाया।
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स्टैंडिंग कमेटी ने वन विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वो सिर्फ पैसों के लिए ऐसे फैसले ले रहे हैं। कमेटी का कहना है कि रणथंभौर नेशनल पार्क में फुल डे सफारी वन्यजीवों के लिए खतरनाक है। इससे जंगल में इंसानी दखल बढ़ेगा। खासकर बाघों की प्राइवेसी पर असर पड़ेगा।
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SC के आदेशों तक की अवहेलना कर चुका वन विभाग
ranthambore
इससे पहले भी रणथंभौर नेशनल पार्क को 12 महीने पर्यटकों के लिए खोले जाने के फैसले का कड़ा विरोध हुआ था जिसमें सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टाइगर कजंर्वेशन अथॉरिटी तक को मामले में अपना दखल देना पड़ा था।
रणथंभौर नेशनल पार्क को मानसून काल में खोले जाने और फुल डे सफारी जैसे फैसले लेना सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभ्यारण्यों को लेकर जारी की गई गाइडलाइनों के सीधे तौर पर अवहेलना करना है। कई बार तो वन विभाग पर पैसों के चक्कर में बाघों की जिंदगी से खिलवाड़ करने तक के आरोप लग चुके हैं जिसको लेकर वन्यजीव प्रेमी कई बार आवाज उठा चुके हैं।
रणथंभौर नेशनल पार्क को मानसून काल में खोले जाने और फुल डे सफारी जैसे फैसले लेना सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभ्यारण्यों को लेकर जारी की गई गाइडलाइनों के सीधे तौर पर अवहेलना करना है। कई बार तो वन विभाग पर पैसों के चक्कर में बाघों की जिंदगी से खिलवाड़ करने तक के आरोप लग चुके हैं जिसको लेकर वन्यजीव प्रेमी कई बार आवाज उठा चुके हैं।