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नन्हें रोजेदार भूखे-प्यासे रहकर कर रहे अल्लाह की इबादत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 18 Jun 2017 07:03 PM IST
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रमजान के महीने मे रोजों के साथ इबादत का दौर भी जारी है। ख्वाजा साहब की नगरी अजमेर मे इन दिनों नन्हें रोजदार भी आसानी से देखे जा सकते हैं। पांच साल से लेकर 12 साल तक के बच्चों ने भी भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की राह मे रोजा रखा हुआ है।
मुस्लिम इलाकों मे रमजान की रौनक घर से बाजारों तक में देखी जा रही है। हर तरफ अल्लाह की इबादत के लिए धार्मिक किताबें और टोपियां खरीदी जा रही हैं। ऐसे मे बच्चे भी अब अल्लाह की इबादत मे मस्जिदों की ओर रुख किए हुए हैं। एक ओर जहां गर्मी मे प्यास और भूख को बड़े-बड़े सहन नही कर पाते वहीं पांच साल से लेकर 12 साल तक के बच्चे 15 घंटे भूखे—प्यासे रहकर रोजा रख रहे हैं। मासूम बच्ची नुजहत ने भी रोजा रखकर इस्लाम का एक फर्ज अदा किया तो भाई जैद खान ने भी अल्लाह की राह में अपनी भूख—प्यास मिटा दी और कम उम्र से ही रोजा रखना शुरू कर दिया। आज ये बच्चे अपने घर के बड़ों की तरह इबादत में अपना पूरा वक्त तो बिताते ही हैं, साथ ही स्कूल और अपने दोस्तों में नन्हे रोजेदारों के नाम से भी पहचाने जाने लगे हैं।
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मुस्लिम इलाकों मे रमजान की रौनक घर से बाजारों तक में देखी जा रही है। हर तरफ अल्लाह की इबादत के लिए धार्मिक किताबें और टोपियां खरीदी जा रही हैं। ऐसे मे बच्चे भी अब अल्लाह की इबादत मे मस्जिदों की ओर रुख किए हुए हैं। एक ओर जहां गर्मी मे प्यास और भूख को बड़े-बड़े सहन नही कर पाते वहीं पांच साल से लेकर 12 साल तक के बच्चे 15 घंटे भूखे—प्यासे रहकर रोजा रख रहे हैं। मासूम बच्ची नुजहत ने भी रोजा रखकर इस्लाम का एक फर्ज अदा किया तो भाई जैद खान ने भी अल्लाह की राह में अपनी भूख—प्यास मिटा दी और कम उम्र से ही रोजा रखना शुरू कर दिया। आज ये बच्चे अपने घर के बड़ों की तरह इबादत में अपना पूरा वक्त तो बिताते ही हैं, साथ ही स्कूल और अपने दोस्तों में नन्हे रोजेदारों के नाम से भी पहचाने जाने लगे हैं।
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