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अफराजुल जैसे कोई और ना जले नफरत की आग में इसलिए एक मंच पर आए सामाजिक कार्यकर्ता

Sun, 07 Jan 2018 11:58 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sun, 07 Jan 2018 11:58 AM IST
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rajsamand live murder- activists gathered to form a citizen council to stop hate crime
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राजसमंद के बहुचर्चित अफराजुल खान लाइव हत्याकांड की दिल दहला देने वाली घटना के बाद अब शहर में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को रोकने का बीड़ा उठाया है। राजसमंद में नफरत की हिंसा को रोकने के लिए एक सिटिजन काउंसिल की स्थापना की जाएगी जिससे लोगों को इस तरह की हिंसा करने से बचाया जा सके।
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राजसमंद में मजदूर किसान शक्ति सेवा संगठन के आहृवान पर एक विचार गोष्ठि का आयोजन किया गया जिसमें आसाम,गुजरात,महाराष्ट्र,तमिलनाडू,केरल,उत्तर प्रदेश,दिल्ली,बिहार और झारखंड से आए कार्यकर्ता शामिल हुए। इस कार्यक्रम में अरुणा रॉय,हर्ष मंदर,सतीश देशपांडे सरीके सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए और देश के बिगड़े हालातों पर चिंता जताई।
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कार्यक्रम में राजसमंद के लाइव मर्डर के बाद उपजे तनाव के बारे में सामाजिक कार्यकर्ताओ ने अपने विचार रखे और कई राज्यों से आए स्वयंसेवकों से ऐसे हत्याकांड रोकने,सामाजिक समरसता बनाए रखने,भाईचारा और भेदभाव मिटाने के लिए तत्पर रहने की अपील की। 
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राजसमंद ने देश को दिया आरटीआई वहां लाइव मर्डर होना कलंक जैसा: रॉय

rajsamand live murder- activists gathered to form a citizen council to stop hate crime
अरुणा रॉय
कार्यक्रम में मंच पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं,साहित्यकारों ने देश के राजनीतिक माहौल पर गहरी चिंता जताई और राजनेताओं को आड़े हाथों लिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सर्वानंद ने कहा कि चुनावी रैलियों के माध्यम से कुछ लोगों ने देश के शांत वातावरण में नफरत घोलने का काम किया है। उन्होनें कहा ​कि देश में नशे के साथ साथ नफरत भी तेजी से बढ़ी है जो कि समाज के हर वर्ग को खोखला कर रही है।


मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानिक सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि सत्ता का कोई धर्म नहीं होता और जो सत्ता में होता है उसे अगर ये लगता है कि वो कुछ भी कर सकता है तो उसकी ये सोच गलत है। रॉय ने कहा राजसमंद से ही सूचना का अधिकार की बिगुल बजी थी लेकिन इसके विपरित अफराजुल हत्याकांड जैसी घटना किसी कलंक से कम नहीं है। 

साहित्यकार अपूर्वानंद ने कहा कि आज अफराजुल हत्याकांड को लगभग एक महीना बीत चुका है फिर भी सरकार ने राजसमंद में रह रहे बांग्लादेशी परिवारों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है वहीं पलायन कर रहे परिवारों को भी यहां सुरक्षा देने का कोई वादा सरकार द्वारा नहीं किया गया है।  
 
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