Rajasthan Political Crisis: सचिन पायलट को किरोड़ी मीणा की नसीहत, 'स्वाभिमानी हैं तो कांग्रेस को छोड़ दें'
सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि कांग्रेसी पायलट को गद्दार, नकारा और निकम्मा कह रहे हैं। ऐसे में सचिन पायलट को आत्मचिंतन की जरूरत है कि वो क्या करेंगे। वह आप में जाएंगे या भाजपा और बसपा को अपनाएंगे या फिर खुद की पार्टी बनाएंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान में मचे सियासी घमासान के बीच राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सचिन पायलट को लेकर बयान दिया है। मीणा ने कहा कि पायलट यदि स्वाभिमानी हैं तो उन्हें जवाब देना चाहिए और कांग्रेस में नहीं रहना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार किरोड़ी लाल मीणा सचिन पायलट का पक्ष लेते हुए गहलोत पर जमकर बरसे। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ड्रामेबाज बताया। किरोड़ी मीणा ने कहा कि कांग्रेसी सचिन पायलट को नकारा, निकम्मा और गद्दार कह रहे हैं। ऐसे में सचिन पायलट को आत्मचिंतन की जरूरत है। ऐसी अपमानजनक स्थिति में उन्हें वहां नहीं रहना चाहिए। पायलट को अपने और पूर्वी राजस्थान के हित में कोई न कोई फैसला लेना चाहिए। सचिन पायलट खुद निर्णय करें कि वह आप में जाएंगे या भाजपा और बसपा को अपनाएंगे या फिर खुद की पार्टी बनाएंगे।
बिना सीएम के शह पर धारीवाल और खाचरियावास बोल नहीं सकते
राजस्थान में सियासी ड्रामे को लेकर सांसद मीणा ने गहलोत सरकार पर जमकर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता सैंडविच बनी हुई है। प्रशासन बेलगाम हो चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पद का लोभ नहीं होने की बात कहते हैं लेकिन एक साल के सीएम बने रहने के लिए पूरा ड्रामा भी उन्होंने कराया। बिना मुख्यमंत्री की शह से शांति धारीवाल इतना बोल नहीं सकते थे। महेश जोशी व्हिप जारी कर शांति धारीवाल के घर बैठक नहीं बुला सकते थे। इसके अलावा प्रताप सिंह खाचरियावास बढ़-चढ़कर बयानबाजी नहीं कर सकते थे।
स्पीकर विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करे
मीणा ने कहा कि गांधी परिवार की बात मानने का दावा करने वाले अशोक गहलोत ने गांधी परिवार की बात नहीं मानी। पद का लोभ नहीं होने की बात कहने वाले मुख्यमंत्री ने पद का लोभ दिखाया और अनुशासन की बात करने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे सियासी ड्रामे में अनुशासनहीनता की। उन्होंने मांग की कि विधानसभा अध्यक्ष को यह बात सार्वजनिक करनी चाहिए कि कितने विधायकों और मंत्रियों ने इस्तीफे दिए। उन्हें इस्तीफे स्वीकार करने चाहिए।