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हर रोज 8 घंटे रहना चाहता है पिता के साथ,मासूम ने लगाई कोर्ट में गुहार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 13 Dec 2017 09:01 PM IST
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पति-पत्नी के मतभेदों के बीच उनके दस साल के बच्चे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हर दिन पिता को उसके साथ आठ घंटे बिताने की गुहार की है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस संबंध में कोई कानूनी प्रावधान नहीं होने के चलते याचिका को खारिज भी कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने कहा कि इस मांग को देखते हुए विधायिका को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 में संशोधन के लिए कदम उठाना चाहिए। न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने यह आदेश सत्यम खंडेलवाल के अपनी मां के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दस साल के बच्चे को अपने पिता के साथ समय बिताने के साथ-साथ पिता से लाड-प्यार भी पाने का अधिकार है। समाज की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसे औचित्यहीन भी नहीं कहा जा सकता। पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद या मनमुटाव के कारण वैवाहिक विवाद भले ही पैदा हो रहे हों, लेकिन इसकी सीधी हानि ऐसे मासूमों को झेलनी पड़ती है, जिनका इस विवाद में कोई भूमिका नहीं रहती।
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इसके साथ ही अदालत ने कहा कि इस मांग को देखते हुए विधायिका को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 में संशोधन के लिए कदम उठाना चाहिए। न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने यह आदेश सत्यम खंडेलवाल के अपनी मां के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दस साल के बच्चे को अपने पिता के साथ समय बिताने के साथ-साथ पिता से लाड-प्यार भी पाने का अधिकार है। समाज की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसे औचित्यहीन भी नहीं कहा जा सकता। पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद या मनमुटाव के कारण वैवाहिक विवाद भले ही पैदा हो रहे हों, लेकिन इसकी सीधी हानि ऐसे मासूमों को झेलनी पड़ती है, जिनका इस विवाद में कोई भूमिका नहीं रहती।
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ये था मामला
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मामले के अनुसार मनोज खंडेलवाल और राजकुमारी खंडेलवाल का 11 फरवरी 2005 में विवाह हुआ था। वहीं 16 दिसंबर 2006 को पुत्र सत्यम का जन्म हुआ। आपसी विवाद के चलते पति-पत्नी अलग हो गए और पारिवारिक अदालत ने 16 मई 2017 को मनोज की ओर से दायर विवाद विच्छेद की याचिका स्वीकार कर ली।
वहीं सत्यम की ओर से अदालत में याचिका दायर कर पिता के साथ समय बीताने की गुहार की गई। जिसे अदालत ने 24 जून 2017 को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अदालत को सुनवाई का प्रारंभिक क्षेत्राधिकार न होकर हाईकोर्ट के आदेश से ट्रांसफर हुए मुकदमों की सुनवाई का ही हक है। इसके खिलाफ सत्यम की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
वहीं सत्यम की ओर से अदालत में याचिका दायर कर पिता के साथ समय बीताने की गुहार की गई। जिसे अदालत ने 24 जून 2017 को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अदालत को सुनवाई का प्रारंभिक क्षेत्राधिकार न होकर हाईकोर्ट के आदेश से ट्रांसफर हुए मुकदमों की सुनवाई का ही हक है। इसके खिलाफ सत्यम की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।