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राजीव गांधी का नाम हटाकर 'अटल' जोड़ना सरकार को पड़ा भारी, कोर्ट ने निरस्त किए आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 19 Jan 2018 08:08 PM IST
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राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : amar ujala
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की पंचायतों में राजीव गांधी सेवा केन्द्रों का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र करने के राज्य सरकार के 28 दिसंबर 2014 के आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने सुझाव दिया है कि सरकार को इनका स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर नामकरण करना चाहिए।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि नरेगा अधिनियम के तहत वर्ष 2009 में केन्द्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर राजीव गांधी सेवा केन्द्रों के निर्माण का प्रावधान किया था। वहीं राज्य की भाजपा सरकार ने 28 दिसंबर 2014 में मुख्यमंत्री की मंशा से एक प्रशासनिक आदेश जारी कर इसका नाम बदल कर अटल सेवा केन्द्र कर दिया। याचिका में कहा गया कि केन्द्र सरकार की अधिसूचना को राज्य सरकार मात्र प्रशासनिक आदेश जारी कर बदल नहीं सकती है।
ऐसे में सेवा केन्द्रों का नाम बदलने की कार्यवाही अवैध है। याचिका में यह भी कहा गया कि राजीव गांधी और अटल बिहारी दोनों ही सम्मानीय हैं, लेकिन इस तरह एक का सम्मान छीनकर दूसरे को नहीं दिया जाना चाहिए। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि सेवा केन्द्र का नाम बदलने के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है। वर्ष 2013 में ही केन्द्र सरकार के स्तर पर इन केन्द्रों का नाम बदलने को लेकर सहमति हो गई थी।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार के 28 दिसंबर 2014 के आदेश को रद्द करते हुए सरकार को इनका नामकरण स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर करने का सुझाव दिया है।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि नरेगा अधिनियम के तहत वर्ष 2009 में केन्द्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर राजीव गांधी सेवा केन्द्रों के निर्माण का प्रावधान किया था। वहीं राज्य की भाजपा सरकार ने 28 दिसंबर 2014 में मुख्यमंत्री की मंशा से एक प्रशासनिक आदेश जारी कर इसका नाम बदल कर अटल सेवा केन्द्र कर दिया। याचिका में कहा गया कि केन्द्र सरकार की अधिसूचना को राज्य सरकार मात्र प्रशासनिक आदेश जारी कर बदल नहीं सकती है।
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ऐसे में सेवा केन्द्रों का नाम बदलने की कार्यवाही अवैध है। याचिका में यह भी कहा गया कि राजीव गांधी और अटल बिहारी दोनों ही सम्मानीय हैं, लेकिन इस तरह एक का सम्मान छीनकर दूसरे को नहीं दिया जाना चाहिए। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि सेवा केन्द्र का नाम बदलने के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है। वर्ष 2013 में ही केन्द्र सरकार के स्तर पर इन केन्द्रों का नाम बदलने को लेकर सहमति हो गई थी।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार के 28 दिसंबर 2014 के आदेश को रद्द करते हुए सरकार को इनका नामकरण स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर करने का सुझाव दिया है।
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वसुंधरा सरकार को लगा झटका
court Shimla
राज्य सरकार का आदेश निरस्त करने से राजस्थान में बीजेपी सरकार को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने जिला मुख्यालयों पर बने जन सुविधा केंद्रों एवं पंचायत समिति मुख्यालयों पर बने भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नामकरण अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से कर दिया था। राजस्थान में करीब नौ हजार से ज्यादा सेवा केंद्र हैं। इन सेवा केंद्रों के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाने का कांग्रेस ने विरोध किया था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने जिला मुख्यालयों पर बने जन सुविधा केंद्रों एवं पंचायत समिति मुख्यालयों पर बने भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नामकरण अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से कर दिया था। राजस्थान में करीब नौ हजार से ज्यादा सेवा केंद्र हैं। इन सेवा केंद्रों के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाने का कांग्रेस ने विरोध किया था।