{"_id":"5a7080844f1c1ba0268b745e","slug":"rajasthan-highcourt-ask-that-why-not-appointment-despite-selection","type":"story","status":"publish","title_hn":"चयन होने के बाद नियुक्ति नहीं देने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चयन होने के बाद नियुक्ति नहीं देने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 30 Jan 2018 08:02 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2016 में चयन के बावजूद नियुक्ति नहीं देने पर अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही अदालत ने नियुक्तियों को याचिका के निर्णयाधीन रखा है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश मुकेश व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि भर्ती बोर्ड ने 22 सितंबर 2016 को प्रयोगशाला सहायक के 1 हजार 896 पदों पर भर्ती निकाली। जिसमें पुलिस विभाग में कार्यतर याचिकाकर्ताओं का चयन हो गया, लेकिन बोर्ड ने उन्हें विभागीय कोटे में नहीं मानते हुए नियुक्ति से वंचित कर दिया।
जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार के एक विभाग से दूसरे विभाग में चयनीत हुए हैं। ऐसे में उन्हें लोक सेवक मानते हुए विभागीय कोटे के तहत नियुक्ति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए भर्तियों को याचिका के निर्णयाधीन रखा है।
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न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश मुकेश व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि भर्ती बोर्ड ने 22 सितंबर 2016 को प्रयोगशाला सहायक के 1 हजार 896 पदों पर भर्ती निकाली। जिसमें पुलिस विभाग में कार्यतर याचिकाकर्ताओं का चयन हो गया, लेकिन बोर्ड ने उन्हें विभागीय कोटे में नहीं मानते हुए नियुक्ति से वंचित कर दिया।
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जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार के एक विभाग से दूसरे विभाग में चयनीत हुए हैं। ऐसे में उन्हें लोक सेवक मानते हुए विभागीय कोटे के तहत नियुक्ति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए भर्तियों को याचिका के निर्णयाधीन रखा है।
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