चुनाव पूर्व अयोग्यता को केवल चुनाव याचिका से ही दी जा सकती है चुनौती-हाईकोर्ट
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राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्वाचित सरपंच को चुनाव पूर्व अयोग्यता को केवल चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है। सरपंच को हाईकोर्ट में रिट याचिका के जरिये नहीं हटाया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने जमवारामगढ़ की ग्राम पंचायत ताला के सरपंच अन्नू खां को सरपंच पद से हटाने के एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश अन्नू खां की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। अपील में अधिवक्ता प्रेमचंद देवन्दा ने अदालत को बताया कि सरपंच पद चुनाव में हारे कैलाश चन्द्र शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि अपीलार्थी ने अपनी संतानों की जन्मतिथी की गलत जानकारी देकर चुनाव लडा था। कट ऑफ डेट के बाद दो संतान होने के कारण अपीलार्थी को चुनाव लडने के लिए अपात्र बताते हुए उसे सरपंच पद से हटाने की गुहार की गई थी।
अपील में यह की गई थी गुहार
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने गत 22 जनवरी को याचिका स्वीकार करते हुए अपीलार्थी को पद से हटाने के आदेश दिए। अपील में कहा गया कि एकलपीठ में कैलाश चन्द्र शर्मा ने अधूरी जानकारी देकर आदेश हासिल किया है। इसके अलावा चुनाव याचिका के अतिरिक्त पंचायत के चुनाव को अन्य माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपीलार्थी के खिलाफ याचिका स्वीकार कर गलत आदेश दिए हैं। अपील में गुहार की गई की एकलपीठ के आदेश को रद्द किया जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने माना कि सरपंच को चुनाव याचिका के जरिए ही पद से हटाया जा सकता है। इसके साथ ही खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को भी रद्द कर दिया है।