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जीएसटी और नोटबंदी नहीं, भाजपा यहां इस मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 26 Dec 2017 12:28 PM IST
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फाइल फोटो।
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गुजरात विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से बहुमत पाने वाली भाजपा के नेताओं के माथे पर आगामी चुनावों के लिए चिंता की लकीरें उभर आई हैं।
दरअसल आगामी दिनों में राजस्थान में दो लोकसभा सीट व एक विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव होना है। लेकिन जीएसटी और नोटबंदी पर आमजन के गुस्से को झेल रहे भाजपा के स्थानीय नेता इन मुद्दो को गोल करने की तैयारी में जुटे हैं।
अजमेर व अलवर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव में भाजपा नेता गो-तस्करी को मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुके हैं। यहां आए दिन कथित गो तस्करों और कथित गो सेवकों के बीच मारपीट व फायरिंग होती रहती है। वहीं पुलिस भी कई बार गो तस्करों द्वारा होने वाली फायरिंग का शिकार हो चुकी है।
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दरअसल आगामी दिनों में राजस्थान में दो लोकसभा सीट व एक विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव होना है। लेकिन जीएसटी और नोटबंदी पर आमजन के गुस्से को झेल रहे भाजपा के स्थानीय नेता इन मुद्दो को गोल करने की तैयारी में जुटे हैं।
अजमेर व अलवर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव में भाजपा नेता गो-तस्करी को मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुके हैं। यहां आए दिन कथित गो तस्करों और कथित गो सेवकों के बीच मारपीट व फायरिंग होती रहती है। वहीं पुलिस भी कई बार गो तस्करों द्वारा होने वाली फायरिंग का शिकार हो चुकी है।
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विवादास्पद बयानबाजी कर रहे हैं नेता
ज्ञानदेव आहूजा
हाल ही में अलवर के रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा गो-तस्करी के खिलाफ आया बयान इसकी शुरुआत माना जा रहा है। उन्होंने कहा था कि जो लोग गो तस्करी करेंगे वे एेसे ही मरेंगे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार अलवर व अजमेर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस कई मायनों में बढ़त लेती दिख रही है। जिसका प्रमुख कारण है जहां अजमेर लोकसभा में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट का दबदबा तो अलवर में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाली जितेन्द्र सिंह का राजनीतिक कद।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार अलवर व अजमेर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस कई मायनों में बढ़त लेती दिख रही है। जिसका प्रमुख कारण है जहां अजमेर लोकसभा में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट का दबदबा तो अलवर में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाली जितेन्द्र सिंह का राजनीतिक कद।
कांग्रेस ने शुरू की ये तैयारी
प्रतीकात्मक फोटो
इसी का परिणाम है कि उपचुनावों की आधिकारिक घोषणा से पूर्व कांंग्रेस ने अलवर लोकसभा सीट से उम्मीदवार की भी घोषणा कर दी है। जबकि भाजपा अभी तक नाम तय नहीं कर पाई है। वहीं अब भाजपा के स्थानीय नेता बीते नौ माह में तीन गो-तस्करों की मौत और प्रतिदिन गो-तस्करों की गोली झेलती पुलिस को चुनावी मुद्दा बनाना चाहते है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा आगामी उपचुनावों में जीएसटी और नोटबंदी पर सवालों से बचने का प्रयास करेगी।