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रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने की गहलोत की तारीफ,राजे सरकार के बारे में ये कहा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 12 Aug 2017 07:51 PM IST
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रेलवे बोर्ड चेयरमेन एके मित्तल
- फोटो : amar ujala
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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल ने रेलवे की बंद पड़ी पुरानी योजनाओं को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार को लेकर बड़ी बात कही है।
मित्तल ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान के जनजाति क्षेत्र को रेल से जोड़ने के लिए पिछली सरकार में शुरू हुआ डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा नई रेल लाइन का प्रोजेक्ट नई सरकार के आने के बाद से ही ठंडे बस्ते में पड़ा है। शनिवार को उदयपुर दौरे पर आए रेलवे बोर्ड चेयरमैन ए.के. मित्तल ने उदयपुर सिटी स्टेशन पर प्रेस वार्ता के दौरान इस संदर्भ में किए गए सवाल पर कहा कि राजस्थान सरकार से सहयोग नहीं मिल पाने के कारण इस प्रोजेक्ट में कोई कदम आगे नहीं बढ़ पाया है।
दरअसल, यह प्रोजेक्ट राजस्थान में पिछली अशोक गहलोत सरकार के समय शुरू हुआ था। जनजाति क्षेत्र तक रेलगाड़ी पहुंचाने के मद्देनजर राज्य सरकार ने इसके खर्च में भागीदारी करने का निर्णय किया था। इसके तहत 1200 करोड़ रुपए राज्य सरकार को देने थे। तब अशोक गहलोत सरकार ने पहली किस्त के रूप में 200 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन सरकार बदलने के बाद रेलवे को एक पैसा भी नहीं मिला। ऐसे में दक्षिणी राजस्थान के जनजाति क्षेत्र को देश के अन्य भागों से बड़ी रेल लाइन से जुड़ने का सपना अभी दूर है। डूंगरपुर स्टेशन उदयपुर-अहमदाबाद मीटरगेज मार्ग पर स्थित है, लेकिन बांसवाड़ा में तो आजादी के बाद से ही अब तक रेल का इंतजार है।
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मित्तल ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान के जनजाति क्षेत्र को रेल से जोड़ने के लिए पिछली सरकार में शुरू हुआ डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा नई रेल लाइन का प्रोजेक्ट नई सरकार के आने के बाद से ही ठंडे बस्ते में पड़ा है। शनिवार को उदयपुर दौरे पर आए रेलवे बोर्ड चेयरमैन ए.के. मित्तल ने उदयपुर सिटी स्टेशन पर प्रेस वार्ता के दौरान इस संदर्भ में किए गए सवाल पर कहा कि राजस्थान सरकार से सहयोग नहीं मिल पाने के कारण इस प्रोजेक्ट में कोई कदम आगे नहीं बढ़ पाया है।
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दरअसल, यह प्रोजेक्ट राजस्थान में पिछली अशोक गहलोत सरकार के समय शुरू हुआ था। जनजाति क्षेत्र तक रेलगाड़ी पहुंचाने के मद्देनजर राज्य सरकार ने इसके खर्च में भागीदारी करने का निर्णय किया था। इसके तहत 1200 करोड़ रुपए राज्य सरकार को देने थे। तब अशोक गहलोत सरकार ने पहली किस्त के रूप में 200 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन सरकार बदलने के बाद रेलवे को एक पैसा भी नहीं मिला। ऐसे में दक्षिणी राजस्थान के जनजाति क्षेत्र को देश के अन्य भागों से बड़ी रेल लाइन से जुड़ने का सपना अभी दूर है। डूंगरपुर स्टेशन उदयपुर-अहमदाबाद मीटरगेज मार्ग पर स्थित है, लेकिन बांसवाड़ा में तो आजादी के बाद से ही अब तक रेल का इंतजार है।
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जल्द पूरा होगा अहमदाबाद-उदयपुर आमान परिवर्तन कार्य
अपने उदयपुर प्रवास के दौरान रेलवे के अधिकारियों से चर्चा करते रेलवे बोर्ड के चेयरमेन ए.के मित्तल
- फोटो : amar ujala
उदयपुर-अहमदाबाद आमान परिवर्तन के संबंध में उन्होंने कहा कि उदयपुर से हिम्मतनगर तक कार्य की गति संतोषपूर्ण है, लेकिन अहमदाबाद से हिम्मतनगर की ओर का कार्य हाल ही शुरू हुआ है। ऐसे में पूर्व में जो अनुमान लगाया गया था कि जनवरी 2018 तक यह कार्य पूरा हो जाएगा, लेकिन अब यह समय दिसम्बर 2018 तक पहुंच गया है।
अगले साल मार्च तक उदयपुर को और मिलेंगी गाड़ियां
दक्षिणी भारत तो नहीं, लेकिन रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने उत्तरी भारत के लिए रेल सेवाओं पर सकारात्मकता दिखाई। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बड़े स्टेशनों पर गाड़ियों की पार्किंग की समस्या भी है। ऐसे में रेलवे उदयपुर में भी गाड़ियों की पार्किंग की संभावना देख रहा है। इसी संभावनाओं के बीच उदयपुर को नई सेवाएं भी उपलब्ध हो जाएं, यह भी देखा जा रहा है। अमृतसर सहित दो अन्य जगहों के लिए रेलगाड़ियां आने वाले दिनों में संचालित करने की पूरी उम्मीद उन्होंने जताई।
अगले साल मार्च तक उदयपुर को और मिलेंगी गाड़ियां
दक्षिणी भारत तो नहीं, लेकिन रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने उत्तरी भारत के लिए रेल सेवाओं पर सकारात्मकता दिखाई। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बड़े स्टेशनों पर गाड़ियों की पार्किंग की समस्या भी है। ऐसे में रेलवे उदयपुर में भी गाड़ियों की पार्किंग की संभावना देख रहा है। इसी संभावनाओं के बीच उदयपुर को नई सेवाएं भी उपलब्ध हो जाएं, यह भी देखा जा रहा है। अमृतसर सहित दो अन्य जगहों के लिए रेलगाड़ियां आने वाले दिनों में संचालित करने की पूरी उम्मीद उन्होंने जताई।