{"_id":"5a5469794f1c1b36198b59e2","slug":"padmavati-controversy-new-strategy-of-karani-sena-how-to-protest-film-padmavat","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"करणी सेना की नई रणनीति- 'पद्मावत' लगते ही लगा दो जनता कर्फ्यू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करणी सेना की नई रणनीति- 'पद्मावत' लगते ही लगा दो जनता कर्फ्यू
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 09 Jan 2018 12:44 PM IST
विज्ञापन
padmavati
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावत' के विरोध को लेकर करणी सेना ने नई रणनीति बना ली है। उन्होंने देशवासियों से जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की है।
'पद्मावत' को लेकर चल रहा विवाद रिलीज डेट के साथ और भी बढ़ गया है। फिल्म रिलीज का विरोध करने वाले राजपूत संगठन अब देश भर में दौरे कर रहे हैं। करणी सेना के संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी ने आज देहरादून में पहुंचे। वहां उन्होंने फिल्म का जबरदस्त विरोध किया।
उन्होंने कहा कि जहां तक बात 'पद्मावती' की है, वो किसी भी सूरत में रिलीज नहीं करने दी जाएगी। मेरी राजपूत समाज समेत सभी समाजों से अपील है कि उधर फिल्म सिनेमा हॉल में लगे और इधर जनता कर्फ्यू लगा देना चाहिए। खून से लिखा एक कागज भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की केवल तीन राजधानियां बची हैं जहां अब तक नहीं पहुंचा हूं। अगले दिनों में वहां भी जाकर अपनी सरकार से बात रखूंगा।
विज्ञापन
फिल्मों में राजपूतों को केवल गलत किरदारों के रूप में दिखाया जाता है। वे फिल्म की शुरुआत में घोड़े पर बैठकर हाथ में बंदूक लेकर दिखाया जाता है। फिल्म के अंत में उसे घोड़े के पीछे घिसटता हुआ दिखाया जाता है। राजपूतों को सही किरदार में क्यों नहीं दिखाया जाता।
विज्ञापन
'पद्मावत' को लेकर चल रहा विवाद रिलीज डेट के साथ और भी बढ़ गया है। फिल्म रिलीज का विरोध करने वाले राजपूत संगठन अब देश भर में दौरे कर रहे हैं। करणी सेना के संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी ने आज देहरादून में पहुंचे। वहां उन्होंने फिल्म का जबरदस्त विरोध किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जहां तक बात 'पद्मावती' की है, वो किसी भी सूरत में रिलीज नहीं करने दी जाएगी। मेरी राजपूत समाज समेत सभी समाजों से अपील है कि उधर फिल्म सिनेमा हॉल में लगे और इधर जनता कर्फ्यू लगा देना चाहिए। खून से लिखा एक कागज भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की केवल तीन राजधानियां बची हैं जहां अब तक नहीं पहुंचा हूं। अगले दिनों में वहां भी जाकर अपनी सरकार से बात रखूंगा।
विज्ञापन
फिल्मों में राजपूतों को केवल गलत किरदारों के रूप में दिखाया जाता है। वे फिल्म की शुरुआत में घोड़े पर बैठकर हाथ में बंदूक लेकर दिखाया जाता है। फिल्म के अंत में उसे घोड़े के पीछे घिसटता हुआ दिखाया जाता है। राजपूतों को सही किरदार में क्यों नहीं दिखाया जाता।
तब भी कहा था, अब भी वही कहा है
लोकेन्द्र सिंह कालवी
कालवी ने अपनी बात में कहा कि पहले जब पांच दिसंबर को फिल्म रिलीज होने की बात कही गई थी, तब भी हमने कहा था कि फिल्म रिलीज नहीं करने दी जाएगी। अब नई तिथि सामने आ रही है, अब भी हमारा कहना है कि फिल्म रिलीज नहीं करने दी जाएगी।
हमारी केंद्र सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए फिल्म को पूरी तरफ रोक लगा देनी चाहिए। जिससे किसी तरह की स्थितियां पैदा न हो।
कावली ने सेंसर बोर्ड से पहले कुछ पत्रकारों को फिल्म दिखाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब चंद लोगों ने फिल्म में किसी तरह की कमी नहीं बताई बाद में जब इतिहास कारों के पैनल ने आपत्तियां जता दी तो क्या पहले हरी झंड़ी देने वालों को अब माफी नहीं मांगनी चाहिए क्या।
हमारी केंद्र सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए फिल्म को पूरी तरफ रोक लगा देनी चाहिए। जिससे किसी तरह की स्थितियां पैदा न हो।
कावली ने सेंसर बोर्ड से पहले कुछ पत्रकारों को फिल्म दिखाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब चंद लोगों ने फिल्म में किसी तरह की कमी नहीं बताई बाद में जब इतिहास कारों के पैनल ने आपत्तियां जता दी तो क्या पहले हरी झंड़ी देने वालों को अब माफी नहीं मांगनी चाहिए क्या।