{"_id":"59c626204f1c1b25688b609f","slug":"one-year-imprisonment-to-doctor","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"भ्रूण का लिंग बताकर ये डॉक्टर करता था गंदा काम, अब जेल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भ्रूण का लिंग बताकर ये डॉक्टर करता था गंदा काम, अब जेल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 23 Sep 2017 02:58 PM IST
विज्ञापन
डेमो इमेज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्भ में भ्रूण के लिंग की जांच करने के मामले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत डाॅ. राजेन्द्र कच्छावा को अदालत ने दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। डाॅ. कच्छावा उदयपुर के वैल स्प्रिंग अमोलक डायग्नोस्टिक सेंटर के मालिक हैं।
सूत्रों के अनुसार मामला 13 जून 2006 का है। स्टिंग ऑपरेशन में गर्भवती महिला को डिकाॅय बनाकर वैल स्प्रिंग अमोलक डायग्नोस्टिक सेंटर भेजा गया था। डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने एक हजार रुपए लेकर लिंग परीक्षण कर उसका वर्जन भी बता दिया था। डॉक्टर ने गर्भ में ही भ्रूण की हत्या करने की जानकारी दी थी जो स्टिंग ऑपरेशन कैमरे में साफ कैद हो गई। मामला सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रमेशचंद्र अहारी ने जांच-पड़ताल कराई। इसके बाद डॉ. राजेंद्र कच्छावा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया। जिसके बाद अदालत ने शुक्रवार को उन्हें दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार मामला 13 जून 2006 का है। स्टिंग ऑपरेशन में गर्भवती महिला को डिकाॅय बनाकर वैल स्प्रिंग अमोलक डायग्नोस्टिक सेंटर भेजा गया था। डॉ. राजेंद्र कच्छावा ने एक हजार रुपए लेकर लिंग परीक्षण कर उसका वर्जन भी बता दिया था। डॉक्टर ने गर्भ में ही भ्रूण की हत्या करने की जानकारी दी थी जो स्टिंग ऑपरेशन कैमरे में साफ कैद हो गई। मामला सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रमेशचंद्र अहारी ने जांच-पड़ताल कराई। इसके बाद डॉ. राजेंद्र कच्छावा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया। जिसके बाद अदालत ने शुक्रवार को उन्हें दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
विज्ञापन
सेंटर प्रबंधक के खिलाफ भी पेश हुआ था परिवाद
डेमो इमेज
मामले को लेकर तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस यादव ने 17 मार्च 2008 को अदालत में वैल स्प्रिंग अमोलक डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉ. राजेंद्र कच्छावा और उसके प्रबंधक के खिलाफ परिवाद पेश किया था। धारा 23 गर्भधारण पूर्व व प्रसव पूर्व तकनीकी (लिंग निर्धारण का वर्जन) अधिनियम 1994 सपठित 1996 के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में इसे पेश किया गया।
विशिष्ट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पीसीपीएनडीटी एक्ट प्रकरण) के पीठासीन अधिकारी समरेंदर सिंह सिकरवार ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद डॉ. राजेंद्र कच्छावा वैल स्प्रिंग अमोलक डायग्नोस्टिक सेंटर को गर्भ धारण पूर्व व प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (लिंग निर्धारण का वर्जन) अधिनियम 1994 की धारा 4 सपठित धारा 23 के तहत दोषी करार देते हुए एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। चिकित्सक को अपराध धारा 5 (2) 6 के आरोप से दोषमुक्त किया गया। अधिनियम की धारा 23 के तहत अग्रिम कार्रवाई के लिए निर्णय की प्रति समुचित प्राधिकारी अधिकारी उदयपुर को भेजने के निर्देश दिए।
विशिष्ट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पीसीपीएनडीटी एक्ट प्रकरण) के पीठासीन अधिकारी समरेंदर सिंह सिकरवार ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद डॉ. राजेंद्र कच्छावा वैल स्प्रिंग अमोलक डायग्नोस्टिक सेंटर को गर्भ धारण पूर्व व प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (लिंग निर्धारण का वर्जन) अधिनियम 1994 की धारा 4 सपठित धारा 23 के तहत दोषी करार देते हुए एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। चिकित्सक को अपराध धारा 5 (2) 6 के आरोप से दोषमुक्त किया गया। अधिनियम की धारा 23 के तहत अग्रिम कार्रवाई के लिए निर्णय की प्रति समुचित प्राधिकारी अधिकारी उदयपुर को भेजने के निर्देश दिए।