फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Not received cash prizes Army Officers from 12 years

12 साल से पुरस्कार राशि के लिए लड़ रहा है एक खिलाड़ी सैन्य अधिकारी

Wed, 05 Apr 2017 09:02 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 05 Apr 2017 09:02 PM IST
विज्ञापन
Not received cash prizes Army Officers from 12 years
court shimla
राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद खिलाडी सैन्य अधिकारी को नकद पुरस्कार देने के बजाए 12 साल तक मामले को लटकाने पर आश्चर्य जताया है। 
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि यह बडी चौंकाने वाली बात है कि राज्य सरकार को 2005 में ही पुरस्कार राशि देनी चाहिए थी, लेकिन राशि देने की बजाए मामले में अपील कर दी गई। इसके साथ ही अदालत ने अपील को खारिज करते हुए दो माह में भुगतान करने के संबंध में एकलपीठ के दिए आदेश को सही माना है।

न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार और स्पोट्र्स कौंसिल की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए दिए। अधिवक्ता मोहित बलवदा ने बताया कि वर्तमान में मेजर जनरल नरपतसिंह राजपुरोहित अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। नरपतसिंह की ओर से अपने सैन्यकाल में दौरान कई अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। जिसके चलते सरकार की ओर से उन्हें अनुदान नियम,1986 के तहत 2 लाख 15 हजार रुपए के नकद पुरस्कार का भुगतान करना था। 
विज्ञापन


भुगतान नहीं करने पर नरपतसिंह ने 1998 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर अदालत ने 2005 में आदेश देते हुए दो माह में पुरस्कार राशि देने के आदेश दिए। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और खेल परिषद ने खंडपीठ में अपील दायर की। जिसे खारिज करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed