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हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं होगी आरसीए की कोई मीटिंग
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 11 Aug 2017 08:20 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने आरसीए की 18 अगस्त और 19 अगस्त को प्रस्तावित बैठक को स्थगित करते हुए कहा है कि एसोसिएशन की कोई बैठक आयोजित नहीं की जाएगी। यदि बैठक करना जरूरी हो तो इसके लिए अदालत से अनुमति ली जाए। साथ ही, अदालत ने दोनों पक्षकारों की सहमति से आरसीए के भीतर चल रहे सभी विवादों को तय करने के लिए अपने पास मंगा लिए हैं।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव मोहम्मद इकबाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि आरसीए के भीतर सभी विवाद बीसीसीआई की ओर से सम्बद्धता निलंबित करने के कारण हुए हैं। ऐसे में याचिका में बीसीसीआई को भी पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने सभी पक्षों को कहा है कि अपने दस्तावेज शपथ पत्रों के जरिए अदालत में पेश करें। अदालत 23 अगस्त को प्रकरण की सुनवाई करेगी।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव मोहम्मद इकबाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि आरसीए के भीतर सभी विवाद बीसीसीआई की ओर से सम्बद्धता निलंबित करने के कारण हुए हैं। ऐसे में याचिका में बीसीसीआई को भी पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने सभी पक्षों को कहा है कि अपने दस्तावेज शपथ पत्रों के जरिए अदालत में पेश करें। अदालत 23 अगस्त को प्रकरण की सुनवाई करेगी।
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सभी पक्षों ने ये कहा
court
सभी पक्षों की ओर से अदालत को कहा गया कि वह आरसीए के भीतर के विवादों को हाईकोर्ट के माध्यम से तय कराने के लिए सहमत हैं। इस पर अदालत ने जोशी गुट और नांदू गुट की ओर से 18 अगस्त और 19 अगस्त को बुलाई बैठक को स्थगित कर दिया। वहीं कोई भी बैठक आयोजित करने से पहले अदालत की अनुमति लेने के आदेश दिए।
याचिका में अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल और अधिवक्ता दिवेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में खेल संघ खेल अधिनियम, 2005 के प्रावधानों पर चलते हैं। खेल अधिनियम की धारा 16 में विवादों के निपटारे के लिए आब्रिट्रेटर का प्रावधान है। इसके बावजूद आरसीए लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र ने गत 25 जुलाई को आरसीए सचिव आरएस नांदू को पद पर बहाल करने का आदेश दिया, जबकि आब्रिट्रेटर जस्टिस शिवकुमार शर्मा प्रकरण को 10 जुलाई को ही तय कर चुके थे। ऐसे में लोकपाल का 25 जुलाई का आदेश रद्द किया जाए।
याचिका में अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल और अधिवक्ता दिवेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में खेल संघ खेल अधिनियम, 2005 के प्रावधानों पर चलते हैं। खेल अधिनियम की धारा 16 में विवादों के निपटारे के लिए आब्रिट्रेटर का प्रावधान है। इसके बावजूद आरसीए लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र ने गत 25 जुलाई को आरसीए सचिव आरएस नांदू को पद पर बहाल करने का आदेश दिया, जबकि आब्रिट्रेटर जस्टिस शिवकुमार शर्मा प्रकरण को 10 जुलाई को ही तय कर चुके थे। ऐसे में लोकपाल का 25 जुलाई का आदेश रद्द किया जाए।