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इन चार घंटों के दौरान आप नहीं उड़ा पाएंगे पतंगें, जानिए क्यों लग गई है रोक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:46 PM IST
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पतंगबाजी
- फोटो : फाइल फोटो
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मकर संक्रांति का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, पतंगबाजी का शौक परवान चढ़ने लगा है। इसमें खास तौर पर जयपुर में लोग सुबह और शाम के वक्त पतंगबाजी का लुत्फ लेने लगे हैं। पतंगबाजी का आनंद खूब लें, लेकिन ध्यान रखें कि चार घंटों के दौरान पतंगबाजी पर रोक लगा दी गई है।
राजस्थान के जयपुर स्थित स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश जारी कर दिन के चार घंटों में पतंगबाजी करने पर रोक लगा दी है। इस दौरान धारदार मांजे से पक्षियों और लोगों के घायल होने की आशंका बनी रहती है। जानकारी के मुताबिक सुबह 6 से 8 बजे तक और शाम को 5 से 7 बजे के बीच पतंगबाजी करने पर रोक रहेगी। इन चार घंटों पर रोक लगाने से पक्षियों को कम से कम नुकसान हो सकेगा।
दरअसल पक्षियों के उड़ान भरने का समय सुबह और शाम के इन चार घंटों में ज्यादा रहता है। सुबह से समय पक्षियों के उड़ने और शाम के दो घंटों के समय घोंसले की तरफ लौटने का समय होता है। ऐसे में इस दौरान पतंगबाजी पर रोक लगाई गई है।
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राजस्थान के जयपुर स्थित स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश जारी कर दिन के चार घंटों में पतंगबाजी करने पर रोक लगा दी है। इस दौरान धारदार मांजे से पक्षियों और लोगों के घायल होने की आशंका बनी रहती है। जानकारी के मुताबिक सुबह 6 से 8 बजे तक और शाम को 5 से 7 बजे के बीच पतंगबाजी करने पर रोक रहेगी। इन चार घंटों पर रोक लगाने से पक्षियों को कम से कम नुकसान हो सकेगा।
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दरअसल पक्षियों के उड़ान भरने का समय सुबह और शाम के इन चार घंटों में ज्यादा रहता है। सुबह से समय पक्षियों के उड़ने और शाम के दो घंटों के समय घोंसले की तरफ लौटने का समय होता है। ऐसे में इस दौरान पतंगबाजी पर रोक लगाई गई है।
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चाइनीज मांझे पर भी लगी रोक
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आदेश के तहत चाइनीज मांझे की बिक्री के साथ ही उसके इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। चाइनीज मांझे के साथ ही प्लास्टिक और सिंथेटिक मांझा इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि हर साल सैंकड़ों की संख्या में पक्षी और लोग चाइनीज मांझों का शिकार होते हैं। चाइनीज मांझे के साथ ही सिंथेटिक मांझे की धार ज्यादा तेज होने के चलते लोग बुरी तरह घायल हो जाते हैं।
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह अस्पताल में बड़ी संख्या में चाइनीज मांझे से घायल होकर लोग संक्रांति और उसके आस पास के दिन पहुंचते हैं।
गौरतलब है कि हर साल सैंकड़ों की संख्या में पक्षी और लोग चाइनीज मांझों का शिकार होते हैं। चाइनीज मांझे के साथ ही सिंथेटिक मांझे की धार ज्यादा तेज होने के चलते लोग बुरी तरह घायल हो जाते हैं।
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह अस्पताल में बड़ी संख्या में चाइनीज मांझे से घायल होकर लोग संक्रांति और उसके आस पास के दिन पहुंचते हैं।