लोकसभा चुनाव 2019: वोट शेयर के हिचकोलों से भाजपा-कांग्रेस में घबराहट, वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट
राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार गंवाने से भी बड़ा दुख भाजपा को धड़ाम से गिरे वोट प्रतिशत ने दिया है। भाजपा को प्रदर्शन सुधारने के दबाव के साथ लोकसभा के मैदान में कांग्रेस से लड़ाई लड़नी है। इधर, बमुश्किल किनारे लग कर प्रदेश में सरकार बनाने वाली कांग्रेस को अपने बढ़े हुए वोट प्रतिशत को संभाले रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता इसलिए दबाव में हैं कि यहां जैसे-तैसे सरकार बनाने की मिली खुशी इस लोकसभा चुनाव में फीकी न पड़ जाए।
राजस्थान में विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद ही लोकसभा चुनाव आ जाते हैं और पार्टियों को फिर से चुनावी रण में उतरना होता है। दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनाव का परिणाम भाजपा के खिलाफ आया और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले वोट शेयर भी 16.14 प्रतिशत गिर गया। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत 38.8 रहा, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में ये 54.94 प्रतिशत था।
गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी 25 सीटें जीतकर ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। वहीं, पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिसम्बर 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा का मत प्रतिशत 46.05 रहा था। भाजपा को तनाव इसलिए भी है कि हाल ही हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी इस आंकड़े से भी 7.25 प्रतिशत से पीछे रही। पार्टी पर पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा 2013 के चुनाव परिणामों वाला किरश्मा फिर दिखाने का दबाव है।
राज्य में सरकार के बाद कांग्रेस में लोकसभा सीटें हासिल करने की आस बढ़ी है। लेकिन, मत प्रतिशत के लिहाज से दोनों दलों के वोट प्रतिशत में ज्यादा अंतर नहीं रहा। कांग्रेस, भाजपा के मुकाबले मात्र 0.5 वोट शेयर ही अधिक हासिल कर सकी। कांग्रेस का वोट शेयर 39.80 प्रतिशत रहा, तो भाजपा का 38.8 प्रतिशत। कांग्रेस के लिए इतनी राहत जरूर थी कि 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में इस विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत ठीक-ठाक बढ़ा।
लोकसभा 2014 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 30.36 था, जो गत दिसंबर के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 39.3 हो गया। मोदी लहर के चलते 2014 के लोस चुनाव में वर्ष 2009 के मुकाबले कांग्रेस का वोट शेयर 16.83 प्रतिशत गिर गया था। वर्ष 2013 के विधानसभा व 2014 के लोस परिणाम से निराश कांग्रेस को दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में नई ऊर्जा व उत्साह मिला। भाजपा के तेज-तर्रार प्रचार के बीच कांग्रेस को अपने प्रदर्शन को इस लोकसभा चुनाव में भी बनाए रखने का भारी दबाव है।