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JLF में बड़ा खुलासा, दिल्ली की EX CM को बस में किया गया था प्रपोज
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 27 Jan 2018 06:36 PM IST
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शीला दीक्षित
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री जब अपनी किताब को लेकर बात करने लगी तो अपनी युवावस्था के किस्सों का जिक्र भी कर दिया। हम बात कर रहे हैं दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित की। वे आज जयुपर लिटरेचल फेस्टिवल में मुखातिब हो रही थीं।
दरअसल, शीला दीक्षित अपनी किताब 'सिटीजन डेल्ही माई टाइम माई लाइफ' के विमोचन के लिए आई जयपुर आई थी। इस दौरान पत्रकार और एंकर विनोद दुआ से संवाद करते हुए शीला दीक्षित ने दिल्ली को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
अपनी युवावस्था को याद करते हुए शीला दीक्षित ने बताया कि मैं मिरांडा हाउस में पढ़ती थी और हमारे कॉलेज और सेंट स्टीवंस कॉलेज के लिए एक ही बस चलती थी। दोनों कॉलेजों में बड़ा ही अच्छा रिश्ता था और मेरे पति ने मुझे इस बस में प्रपोज किया था। बात चलती रही, क्योंकि उस जमाने में हम माता-पिता की आज्ञा के बिना शादी नहीं कर सकते थे, फिर हमारा अंतरजातीय विवाह था, लेकिन घरवालों की रजामंदी के बाद विवाह हो गया।
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दरअसल, शीला दीक्षित अपनी किताब 'सिटीजन डेल्ही माई टाइम माई लाइफ' के विमोचन के लिए आई जयपुर आई थी। इस दौरान पत्रकार और एंकर विनोद दुआ से संवाद करते हुए शीला दीक्षित ने दिल्ली को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
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अपनी युवावस्था को याद करते हुए शीला दीक्षित ने बताया कि मैं मिरांडा हाउस में पढ़ती थी और हमारे कॉलेज और सेंट स्टीवंस कॉलेज के लिए एक ही बस चलती थी। दोनों कॉलेजों में बड़ा ही अच्छा रिश्ता था और मेरे पति ने मुझे इस बस में प्रपोज किया था। बात चलती रही, क्योंकि उस जमाने में हम माता-पिता की आज्ञा के बिना शादी नहीं कर सकते थे, फिर हमारा अंतरजातीय विवाह था, लेकिन घरवालों की रजामंदी के बाद विवाह हो गया।
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फिर राजीव गांधी से ये कहा
शीला दीक्षित
शीला दीक्षित ने बताया कि पति की मौत के बाद राजीव गांधी मुझे ढांढस बंधाने आए थे और उन्होंने पूछा था कि मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं? तो मैंने उन्हें कहा था कि मुझे बहुत व्यस्त बना दीजिए।
उन्होंने मुझे अपने साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में लगा लिया, हालांकि मैं यह चाहती नहीं थी, क्योंकि मैं जानती थी, लोग बहुत जलेंगे, पर मुझे उस स्थिति से उबरने में काफी सहायता मिली।
उन्होंने मुझे अपने साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में लगा लिया, हालांकि मैं यह चाहती नहीं थी, क्योंकि मैं जानती थी, लोग बहुत जलेंगे, पर मुझे उस स्थिति से उबरने में काफी सहायता मिली।