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जयपुर बम ब्लास्ट: नौ साल बीते... कब मिलेगा इंसाफ
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 13 May 2017 12:59 PM IST
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बम ब्लास्ट के बाद ऐसा था हाल
- फोटो : फाइल फोटो
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जयपुर में सिलसिलेवार बम विस्फोट की घटना को नौ साल पूरे हो चुके हैं। इतने साल बीतने के बाद भी पीडि़त परिवारों का न्याय नहीं मिला है।
पीडितों के मन में रोज बस एक ही सवाल उठता है कि आखिर शहर के गुनहगारों को कब सजा मिलेगी। राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए नवंबर 2012 में विशेष अदालत का गठन तो कर दिया, लेकिन अदालत में कभी विशेष अदालत की तरह काम नहीं हुआ। हालांकि यह अभियोजन पक्ष की सफलता कही जाएगी कि प्रकरण में अभी तक एक भी गवाह पक्षद्रोही नहीं हुआ है। जयपुर शहर को दंश देने वाले इस मुकदमे की रफ्तार हमेशा कछुआ चाल ही रही। कभी जज के नहीं होने से तो कभी बचाव पक्ष के वकीलों ने तकनीकी आधार पर मामले में बहस करने से इंकार किया। घटना को नौ साल बीतने के बाद भी अभी तक एक भी मुकदमे में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है।
घटना को लेकर अलग-अलग थानों में कुल आठ एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने जहां इनका अलग-अलग आरोप पत्र पेश किया। वहीं अदालत में भी इनकी अलग-अलग ही ट्रायल शुरू हुई। आठों मामलों में कुल 1 हजार 341 गवाह हैं। इनमें गवाहों में पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ एक ही हैं। जिन्हें बार-बार गवाही के लिए अदालत बुलाया गया। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी मामलों की ट्रायल एक साथ चलती तो मुकदमे की सुनवाई बहुत जल्दी पूरी हो चुकी होती।
अदालत में प्रकरण को लेकर आठ मुकदमों में सुनवाई चल रही है। वहीं दो आरोपियों सैफ और सैफर्रहमान के गुजरात जेल से नहीं आने के चलते पूर् में एफआईआर संख्या 118 के मुकदमे को दो भागों में बांट दिया गया। सभी मुकदमों में अभियोजन पक्ष के गवाह चल रहे हैं। एफआईआर संख्या 118 के पहले भाग में अभियोजन पक्ष का एक गवाह बाकी है। जबकि अन्य सभी मुकदमों में कुल करीब दौ सौ गवाहों के बयान हुए हैं। विशेष अदालत सप्ताह में चार दिन बम कांड की सुनवाई कर ही है, जबकि बाकी दिनों में अन्य फौजदारी अपीलों पर सुनवाई हो रही है।
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पीडितों के मन में रोज बस एक ही सवाल उठता है कि आखिर शहर के गुनहगारों को कब सजा मिलेगी। राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए नवंबर 2012 में विशेष अदालत का गठन तो कर दिया, लेकिन अदालत में कभी विशेष अदालत की तरह काम नहीं हुआ। हालांकि यह अभियोजन पक्ष की सफलता कही जाएगी कि प्रकरण में अभी तक एक भी गवाह पक्षद्रोही नहीं हुआ है। जयपुर शहर को दंश देने वाले इस मुकदमे की रफ्तार हमेशा कछुआ चाल ही रही। कभी जज के नहीं होने से तो कभी बचाव पक्ष के वकीलों ने तकनीकी आधार पर मामले में बहस करने से इंकार किया। घटना को नौ साल बीतने के बाद भी अभी तक एक भी मुकदमे में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है।
घटना को लेकर अलग-अलग थानों में कुल आठ एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने जहां इनका अलग-अलग आरोप पत्र पेश किया। वहीं अदालत में भी इनकी अलग-अलग ही ट्रायल शुरू हुई। आठों मामलों में कुल 1 हजार 341 गवाह हैं। इनमें गवाहों में पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ एक ही हैं। जिन्हें बार-बार गवाही के लिए अदालत बुलाया गया। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी मामलों की ट्रायल एक साथ चलती तो मुकदमे की सुनवाई बहुत जल्दी पूरी हो चुकी होती।
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अदालत में प्रकरण को लेकर आठ मुकदमों में सुनवाई चल रही है। वहीं दो आरोपियों सैफ और सैफर्रहमान के गुजरात जेल से नहीं आने के चलते पूर् में एफआईआर संख्या 118 के मुकदमे को दो भागों में बांट दिया गया। सभी मुकदमों में अभियोजन पक्ष के गवाह चल रहे हैं। एफआईआर संख्या 118 के पहले भाग में अभियोजन पक्ष का एक गवाह बाकी है। जबकि अन्य सभी मुकदमों में कुल करीब दौ सौ गवाहों के बयान हुए हैं। विशेष अदालत सप्ताह में चार दिन बम कांड की सुनवाई कर ही है, जबकि बाकी दिनों में अन्य फौजदारी अपीलों पर सुनवाई हो रही है।
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70 लोगों की हुई थी मौत
चेहरों पर उतर आया था दर्द
- फोटो : अमर उजाला
13 मई 2008 को शहर में आठ स्थानों पर सिलसिलेवार 8 बम विस्फोट हुए थे तथा एक जिंदा बम हनुमान मंदिर के पास से बरामद दिया गया था। घटना में 70 लोगों की मौत हो गई थी तथा 186 लोग घायल हुए थे। मामले में प्रकरण में शाहबाज हुसैन, सरवर, सलमान, सैफ और सैफुर्रहमान को गिरफ्तार किया जा चुका है। वर्तमान में जेल में बंद हैं। वहीं आरिज, शादाब, साजिद बडा और मोहम्मद खालिद फरार हैं। इनमें आतिफ और छोटा साजिद 19 सितंबर 2008 को पुलिस मुटभेड़ में बाटला हाऊस में मारे जा चुके हैं।
जयपुर बम कांड प्रकरण के विशेष लोक अभियोजक विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि अदालत में मामले की नियमित सुनवाई हो रही है। पुलिस की ओर से बडी संख्या में गवाह बनाने के कारण मुकदमें की ट्रायल पूरी होने में समय लग रहा है, हालांकि अभी तक एक भी गवाह पक्षद्रोही नहीं हुआ है। अभी ट्रायल पूरी होने में करीब तीन साल लगे सकते हैं।
जयपुर बम कांड प्रकरण के विशेष लोक अभियोजक विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि अदालत में मामले की नियमित सुनवाई हो रही है। पुलिस की ओर से बडी संख्या में गवाह बनाने के कारण मुकदमें की ट्रायल पूरी होने में समय लग रहा है, हालांकि अभी तक एक भी गवाह पक्षद्रोही नहीं हुआ है। अभी ट्रायल पूरी होने में करीब तीन साल लगे सकते हैं।