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कॉमर्स के कोर्स में गीता का ज्ञान और महावीर के उपदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 14 Mar 2017 02:14 PM IST
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गीता उपदेश।
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राजस्थान में स्कूल से लेकर कॉलेज तक की शिक्षा में बड़े स्तर पर बदलाव हो रहें हैं। इन बदलावों में प्रमुख रुप से भारतीय पौराणिक गाथाओं के ज्ञान को सम्मालित करने का प्रयास किया जा रहा।
अब एक नया बदलाव राजस्थान यूनविर्सिटी कॉमर्स विभाग में करने जा रही हैं। जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी की सिलेबस रिविजन कमेटी ने निर्णय किया है कि एम.कॉम के सिलेबस में गीता के ज्ञान से लेकर योगा के माध्यम से तनाव दूर करने का प्रबंधन सम्मालित किया जाएगा। पहले विदेशी लेखकों को कोर्स से हटाना और अब उनके व्याख्यानों को कोर्स से हटाने की तैयारी कमेटी ने कर ली है। नए पाठ्यक्रम के अनुसार वेद और प्रबंधन, भगवान महावीर, भगवान कृष्ण सहित उनके विभिन्न प्रकार के प्रबंधनों को सम्मलित किया जाएगा।
हटाएं जाएंगें यह व्याख्यान
नए व्याख्यानों को जिनके स्थान पर सम्मलित किया जाएगा उनमें बैकिंग, फाइनेंस व सरकार की वित्तीय संस्थाओं से सबंधित व्याख्यान होंगे। कमेटी के सदस्यों के अनुसार जो व्याख्यान सम्मलित किए जा रहें है उनमें वह सब है जो वर्तमान में प्रचलित प्रबंधन व्याख्यानों में है।
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विश्व ने अपनाया है
कमेटी के सदस्य कहते है कि हमारी धार्मिक पुस्तकों जिसमें रामायण, गीता आदि सम्मलित है उनके प्रबंधनों को विश्व भर में अपनाया गया है। वहीं कॉमर्स विभाग का कहना है कि व्याख्यानों में बदलाव पाठ्यक्रम को भारतीयता के नजदीक ले जाना है। जानकर कहते है कि वेदों को पढ़ने से ना केवल छात्रों को प्रबंधन शिक्षा में फायदा होगा अपितु भारतीय संस्कारों को भी नजदीक से समझ सकेंगे।
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अब एक नया बदलाव राजस्थान यूनविर्सिटी कॉमर्स विभाग में करने जा रही हैं। जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी की सिलेबस रिविजन कमेटी ने निर्णय किया है कि एम.कॉम के सिलेबस में गीता के ज्ञान से लेकर योगा के माध्यम से तनाव दूर करने का प्रबंधन सम्मालित किया जाएगा। पहले विदेशी लेखकों को कोर्स से हटाना और अब उनके व्याख्यानों को कोर्स से हटाने की तैयारी कमेटी ने कर ली है। नए पाठ्यक्रम के अनुसार वेद और प्रबंधन, भगवान महावीर, भगवान कृष्ण सहित उनके विभिन्न प्रकार के प्रबंधनों को सम्मलित किया जाएगा।
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हटाएं जाएंगें यह व्याख्यान
नए व्याख्यानों को जिनके स्थान पर सम्मलित किया जाएगा उनमें बैकिंग, फाइनेंस व सरकार की वित्तीय संस्थाओं से सबंधित व्याख्यान होंगे। कमेटी के सदस्यों के अनुसार जो व्याख्यान सम्मलित किए जा रहें है उनमें वह सब है जो वर्तमान में प्रचलित प्रबंधन व्याख्यानों में है।
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विश्व ने अपनाया है
कमेटी के सदस्य कहते है कि हमारी धार्मिक पुस्तकों जिसमें रामायण, गीता आदि सम्मलित है उनके प्रबंधनों को विश्व भर में अपनाया गया है। वहीं कॉमर्स विभाग का कहना है कि व्याख्यानों में बदलाव पाठ्यक्रम को भारतीयता के नजदीक ले जाना है। जानकर कहते है कि वेदों को पढ़ने से ना केवल छात्रों को प्रबंधन शिक्षा में फायदा होगा अपितु भारतीय संस्कारों को भी नजदीक से समझ सकेंगे।