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'मैं गरीब हूं' मामले को मानवाधिकार आयोग ने माना गम्भीर, राज्य सरकार को भेजा नोटिस

Wed, 28 Jun 2017 01:57 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 28 Jun 2017 01:57 PM IST
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human rights commission sent notice to rajasthan government in bpl matter
दौसा में एक घर के बाहर लिखा 'मैं गरीब हूं' - फोटो : amar ujala
बीपीएल परिवारों के घरों के बाहर 'मैं गरीब हूं' लिखने के बहुचर्चित मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग गम्भीर माना है। मानवाधिकार आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।
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जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में राजस्थान के मुख्य सचिव ओ.पी. मीना को नोटिस भेजा है और लिखित में जवाब मांगा है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने 'गरीबी का ऐसा मजाक, मैं गरीब हूं' शीर्षक के जरिये समाचार प्रसारित कर मामले को उजागर किया था। जिसमें बताया गया था कि राजस्थान की राजधानी जयपुर से केवल 60 किलोमीटर दूर ही दौसा जिले में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां गरीबों की गरीबी ही उनके सामाजिक जीवन पर अभिशाप साबित हो रही है।
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इसके बाद सरकार ने सफाई दी थी कि सरकार ने कलक्टरों को घरों के बाहर ऐसा लिखने के कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा था कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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अपनी सफाई में राठौड़ ने कहा था कि गरीब बीपीएल परिवारों को सही लाभ देने के लिए तत्कालीन सरकार ने 6 अगस्त 2009 और 6 जुलाई 2011 को बीपीएल परिवार का नाम व क्रमांक संख्या लिखने के आदेश जारी किए थे।

शर्मिंदगी का ये था कारण और ये था अधिकारियों का तर्क

human rights commission sent notice to rajasthan government in bpl matter
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
दौसा जिले में यहां के करीब पचास हजार परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून(एनएफएसए) के तहत राशन और अन्य सामग्री-सुविधाओं का लाभ लेने के लिए बीपीएल की सूची में शामिल है। इसके लिए यहां प्रशासन की ओर से इन परिवार के घरों के बाहर बाकायदा पीले रंग से चौखाना पुतवाकर उसमें साफ-साफ ये लिखवाया गया है कि 'मैं गरीब परिवार से हूं और एनएफएसए से गेहूं लेता हूं।'

ऐसे हालात के चलते अब ये बीपीएल में सूची में आने वाले लोग समाज में शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं। यहां तक कि कई उच्च वर्ग के लोग तो इन लोगों को इस लिखावट के कारण ही हेय दृष्टि से देखते हैं और दया का भाव रखते हैं। जबकि, इस सम्बंध में अधिकारियों का कहना था कि बीपीएल परिवारों के घरों के बाहर पात्र और अपात्र लोगों में भेद करने के लिए लिखावट की गई है।
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