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आम रास्ते का पट्टा जारी कर कैसे दी निर्माण की अनुमति, नोटिस जारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 11 Oct 2017 07:37 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा जिले की रामगंज मंडी में स्थित यादव मोहल्ला के आम रास्ते के पट्टे जारी कर निर्माण की स्वीकृति देने के मामले में राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख स्वायत्त शासन सचिव, कोटा कलक्टर, एसडीओ रामगंज मंडी और नगर पालिका सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश अमृतलाल यादव की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार की ओर से नियमित की गई भूमि पर निवास करते हैं। गांव की लिंक रोड पर नगर पालिका ने अवैध पट्टे जारी कर निर्माणकर्ता को निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी। जिसके चलते स्थानीय निवासियों का आम रास्ता बंद हो गया है।
याचिका में कहा गया है कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिसके चलते स्थानीय निवासियों ने मौके पर भूख हड़ताल भी की। याचिका में कहा गया कि नगरपालिका की ओर से आम रास्ते पर पट्टे जारी करने और निर्माण की स्वीकृति देने की कार्यवाही अवैध है।
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ऐसे में पट्टों को रद्द कर आम रास्ते को पूर्व की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दिए जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश अमृतलाल यादव की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार की ओर से नियमित की गई भूमि पर निवास करते हैं। गांव की लिंक रोड पर नगर पालिका ने अवैध पट्टे जारी कर निर्माणकर्ता को निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी। जिसके चलते स्थानीय निवासियों का आम रास्ता बंद हो गया है।
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याचिका में कहा गया है कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिसके चलते स्थानीय निवासियों ने मौके पर भूख हड़ताल भी की। याचिका में कहा गया कि नगरपालिका की ओर से आम रास्ते पर पट्टे जारी करने और निर्माण की स्वीकृति देने की कार्यवाही अवैध है।
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ऐसे में पट्टों को रद्द कर आम रास्ते को पूर्व की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दिए जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।