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पुलिस हिरासत में मौत पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 31 Oct 2017 07:58 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में कथित मौत के मामले में जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक रामेश्वरलाल जाट, डीएसपी भागचन्द मीणा और मनोहरपुर थानाधिकारी उमेश बेनीवाल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश मृतक की विधवा संतीदेवी की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता डॉ. महेश शर्मा ने अदालत को बताया कि गत 28 मई को याचिकाकर्ता के पुत्र की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी थी। पुलिस की ओर से आरोपियों को बचाने पर याचिकाकर्ता के पति कालूराम ने विरोध किया। इस पर पुलिस उसके पति और नाबालिग बेटी को जबरन उठाकर ले गई। अगले दिन कालूराम की लाश सूखे कुएं में मिली, वहीं पुलिस ने नाबालिग बेटी को याचिकाकर्ता के पुत्र की हत्या का आरोपी बना दिया।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता के पति की मौत के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। जबकि उच्चतम न्यायालय तय कर चुका है कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश मृतक की विधवा संतीदेवी की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता डॉ. महेश शर्मा ने अदालत को बताया कि गत 28 मई को याचिकाकर्ता के पुत्र की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी थी। पुलिस की ओर से आरोपियों को बचाने पर याचिकाकर्ता के पति कालूराम ने विरोध किया। इस पर पुलिस उसके पति और नाबालिग बेटी को जबरन उठाकर ले गई। अगले दिन कालूराम की लाश सूखे कुएं में मिली, वहीं पुलिस ने नाबालिग बेटी को याचिकाकर्ता के पुत्र की हत्या का आरोपी बना दिया।
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याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता के पति की मौत के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। जबकि उच्चतम न्यायालय तय कर चुका है कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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