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दशहरा: यहां है रावण की शादी का मंडप, धूमधाम से आई थी बारात
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 29 Sep 2017 07:09 PM IST
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डेमो पिक
- फोटो : डेमो पिक
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रावण की शादी एक अप्सरा की बेटी से हुई थी। रोचक बात यह है कि जिस मंडप में लंकापति रावण ने मंदोदरी के साथ फेरे लिए थे, उसके अवशेष आज भी मौजूद है।
कहा जाता है कि रावण का विवाह राजस्थान में जोधपुर के मंडोर में हुआ था। उस समय रावण के वंशज जो की श्रीमाली समाज के गोदा गोत्र के लोग हैं वह बारात में आए थे। ये लोग विवाह के बाद यहीं बस गए। इनके वंशज आज भी जोधपुर में मौजूद है। ये लोग आज भी रावण की पूजा करते है। इन लोगों ने रावण का मंदिर बनवाया है।
यह मंदिर जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी में बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण श्रीमाली समाज के गोधा गौत्र के लोगो ने बनवाया है। मंदिर में रावण व मंदोदरी की विशाल प्रतिमाएं स्थापित है। दोनों को शिव पूजन करते हुए दर्शाया गया है। पुजारी कमलेश कुमार दवे का दावा है कि उनके पूर्वज रावण के विवाह के समय यहां आकर बस गए।
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कहा जाता है कि रावण का विवाह राजस्थान में जोधपुर के मंडोर में हुआ था। उस समय रावण के वंशज जो की श्रीमाली समाज के गोदा गोत्र के लोग हैं वह बारात में आए थे। ये लोग विवाह के बाद यहीं बस गए। इनके वंशज आज भी जोधपुर में मौजूद है। ये लोग आज भी रावण की पूजा करते है। इन लोगों ने रावण का मंदिर बनवाया है।
यह मंदिर जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी में बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण श्रीमाली समाज के गोधा गौत्र के लोगो ने बनवाया है। मंदिर में रावण व मंदोदरी की विशाल प्रतिमाएं स्थापित है। दोनों को शिव पूजन करते हुए दर्शाया गया है। पुजारी कमलेश कुमार दवे का दावा है कि उनके पूर्वज रावण के विवाह के समय यहां आकर बस गए।
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यहां है रावण की चंवरी
रावण की चंवरी
- फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि असुरों के राजा मयासुर का दिल हेमा नाम की एक अप्सरा पर आ गया था। हेमा को प्रसन्न करने के लिए उसने जोधपुर शहर के निकट किले का निर्माण किया। मयासुर और हेमा की एक बहुत सुंदर पुत्री का जन्म हुआ। इसका नाम मंदोदरी रखा गया। एक बार मयासुर का देवताओं के राज इन्द्र के साथ विवाद हो गया और उसे मंडोर छोड़ कर भागना पड़ा।
उसके जाने के बाद मंडूक ऋषि ने मंदोदरी की देखभाल की। अप्सरा की बेटी होने के कारण मंदोदरी बहुत सुंदर थी। ऐसी रूपवती कन्या के लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था। आखिरकार उनकी खोज उस समय के सबसे बलशाली और पराक्रमी होने के साथ विद्वान राजा रावण पर जाकर पूरी हुई। उन्होंने रावण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा।
मंदोदरी को देखते ही रावण उस पर मोहित हो गया और विवाह के लिए तैयार हो गया। रावण बारात लेकर शादी करने के लिए मंडोर पहुंचा। मंडोर की पहाड़ी पर अभी भी एक स्थान को लोग रावण की चंवरी यानि की शादी का मंडप कहते है। बाद में मंडोर को राठौड़ राजवंश ने मारवाड़ की राजधानी बनाया और सदियों तक शासन किया।
उसके जाने के बाद मंडूक ऋषि ने मंदोदरी की देखभाल की। अप्सरा की बेटी होने के कारण मंदोदरी बहुत सुंदर थी। ऐसी रूपवती कन्या के लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था। आखिरकार उनकी खोज उस समय के सबसे बलशाली और पराक्रमी होने के साथ विद्वान राजा रावण पर जाकर पूरी हुई। उन्होंने रावण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा।
मंदोदरी को देखते ही रावण उस पर मोहित हो गया और विवाह के लिए तैयार हो गया। रावण बारात लेकर शादी करने के लिए मंडोर पहुंचा। मंडोर की पहाड़ी पर अभी भी एक स्थान को लोग रावण की चंवरी यानि की शादी का मंडप कहते है। बाद में मंडोर को राठौड़ राजवंश ने मारवाड़ की राजधानी बनाया और सदियों तक शासन किया।