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बेटियों की उम्मीद हो रही है धूमिल, सरकारी कर्मचारियों की करतूत

Wed, 01 Nov 2017 10:49 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 01 Nov 2017 10:49 AM IST
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Government schemes about education are not beneficial for girls student in jaipur
फाइल फोटो।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश सुनने में जितना अच्छा लगता है उसकी जमीनी हकीकत उतनी ही कष्ट पहुंचाने वाली है। इसका उदाहरण देखने को मिला है राजस्थान की राजधानी जयपुर में।
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यहां शहर के बीचों-बीच स्थित एक सरकारी महारानी उच्च माध्यमिक स्कूल में छात्राओं के लिए आई साइकिलें कबाड़ में तब्दील हो रही है। राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी दो दिन पूर्व ही बेहतरी सरकारी शिक्षा प्रणाली के लिए अपनी पीठ ठोंक चुके है।
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लेकिन राजधानी जयपुर के एक बड़े स्कूल में कबाड़ में बदल रही करीब 42 लाख रुपए कीमत की साइकिलों की कोई सुध लेने वाला नहीं दिख रहा है। सरकारी स्कूल में छात्राओं की संख्या बढ़े और उन्हें आने में सुविधा हो इसके लिए करीब 3300 रुपए की कीमत वाली ये साइकिलें वितरित की जानी है।
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आधा सत्र बीता, नहीं दे रहे हैं ध्यान

Government schemes about education are not beneficial for girls student in jaipur
फाइल फोटो।
आधा ​शैक्षणिक सत्र बीत चुका है, लेकिन अभी तक इन सा​इकिलों का वितरण नहीं हो सका है। साइकिल वितरण पूर्व में भी कई बार खामी सामने आ चुकी है।

हाल हीं में अलवर के रामगढ़ में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। यहां अधिकारियों की लापरवाही के चलते छात्राओं को खराब साइकिल वितरित कर दी गई थी। जिन्हें छात्राओं को स्कूल से ले जाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ा था।
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