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फिर रूठे 'भगवान': चरमराई चिकित्सा व्यवस्था, डिलीवरी तक अटकी

Mon, 18 Sep 2017 03:01 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 18 Sep 2017 03:01 PM IST
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government doctors goes on 1 day strike in rajasthan
जयपुर के कांवटिया अस्पताल के बाहर दर्द से करहाती एक महिला - फोटो : amar ujala
भगवान का दूसरा रूप माने जाने वाले डॉक्टर्स एक बार फिर से सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जिससे प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
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राजधानी जयपुर के सैटेलाइट अस्पतालों में डॉक्टर्स के हड़ताल पर चले जाने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से ठप्प पड़ी है। बीमारियों का मौसम होने की वजह से यहां मरीजों की लंबी कतारे आमतौर पर रहती ही हैं, ऊपर से डॉक्टरों के नहीं होने से अस्पतालों में त्राहिमाम मच गया है।

राजस्थान सरकार द्वारा रेस्मा लगाए जाने के बावजूद भी सेवारत डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए। सेवारत चिकित्सकों के आज सामूहिक अवकाश पर रहने से चिकित्सा सेवाएं पूर्ण रूप से लड़खड़ा गई जिसके चलते दूर-दराज से आए मरीजों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
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प्रसूताओं की नहीं करवा रहे डिलीवरी, नाराज लोगों ने लगाया जाम

government doctors goes on 1 day strike in rajasthan
कांवटिया अस्पताल में मरीजों की भीड़ - फोटो : amar ujala
अलवर जिले में तो महिला अस्पताल में प्रसूताओं की डिलीवरी नहीं करवाने से नाराज परिजनों ने अस्पताल के बाहर जाम लगा दिया। सरहदी जिले जैसलमेर में चिकित्सा सेवाएं आज पूर्ण रूप से चरमरा गई। उदयपुर के एमबी अस्पताल में भी इसका असर देखने को मिला। यहां कार्यरत चिकित्सकों के वार्डों एवं संबंधित इकाई में उपलब्ध नहीं होने से कई मरीजों को भटकना पड़ा। इसी तरह यहां सेटेलाइट चिकित्सालय और ब्लॉक स्तर के अस्पताल में भी चिकित्सकों के अवकाश पर होने से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई।

जानकारी के अनुसार अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आव्हान पर आज एक दिन के लिए प्रदेश के सभी सेवारत चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी  ने बताया कि सेवारत चिकित्सकों की विभिन्न मांगों को लेकर चिकित्सा मंत्री को प्रदेश के 33 जिलों का 33 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया था।

मांगपत्र की प्रमुख मांगों को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में 29 अगस्त को सैद्वांतिक सहमति बनी थी। इसके बाद मांगों के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने 15 दिन की समयावधि चाही गई थी।

सेवारत चिकित्सकों ने 30 अगस्त के सामूहिक अवकाश को स्थगित कर मांगों के क्रियान्वयन के लिए 15 सितंबर तक का समय तय किया। राज्य सरकार की ओर से मांगो पर 15 दिन बाद भी सकारात्मक रूख नहीं अपनाने पर अब आज सभी डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए हैं। 
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