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अब लोकतंत्र के सेनानी कहलाएंगे आपातकाल के बंदी

Tue, 12 Dec 2017 07:02 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Tue, 12 Dec 2017 07:02 PM IST
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emergency prisoners misa bandi now get the status of Democracy Fighter in rajasthan
Emergency 1975 - फोटो : File Photo
देश में आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे नेताओं को राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों का दर्जा देने की निर्णय किया है। 
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राजस्थान में केबिनेट की आज हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। दरअसल, देश में 26 जून 1975 को आपातकाल लगने से लेकर 1977 के दौरान मेंटीनेंस ऑफ इंटर्नल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) और डिफ़ेंस ऑफ इंडिया रूल्स (डीआईआर) के तहत बड़ी संख्या में नेताओं को जेल हुई थी। इन्हे मीसा बंदी एवं डीआरडी बंदी के तौर पर जाना जाता है।  
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इन नेताओं में अधिकांश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ से जुड़े रहे हैं। कुछ वामपंथी नेता भी उस समय जेल गए थे। 
 

पेंशन तथा सहायता की राह खुलेगी

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डेमो इमेज
मीसा और डीआईआर बंदियों की पेंशन का मामला विवादों में रहा है। कई राज्यों ने पहले ही इनका नाम बदलकर लोकतंत्र सेनानी कर दिया था। राजस्थान में इसको लेकर राजनीति होती रही है। 

बंदी शब्द जुड़ा होने से इनको पेंशन देने में कानूनी अड़चन आती है, इसके चलते कांग्रेस शासन के दौरान इनकी पेंशन बंद कर दी थी। बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि मीसा और डीआईआर बंदियों को अब लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया जाएगा। ये मांग लंबे समय से की जा रही  थी। 
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