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विवाह मुश्किल में पड़ जाता है, इसलिए हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 21 Feb 2018 07:40 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करने वाले लड़के-लड़कियों के घर प्रशासन की ओर से भेजे जाने वाले नोटिस पर रोक लगा दी है।
हाइकोर्ट ने प्रदेश के सभी विवाह अधिकारियों को कहा है कि वे विवाह के लिए आवेदन करने वालों के घर ऐसा कोई नोटिस नहीं भेजे। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश कुलदीपसिंह मीणा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि परिवारजनों की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण लड़के-लडकियां विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह करते हैं। वयस्क जोड़े की ओर से इसके लिए विवाह अधिकारी के समक्ष आवेदन किया जाता है। वहीं विवाह अधिकारी संबंधित थानाधिकारी के जरिये लड़के और लड़की के निवास स्थान पर नोटिस भेज देते हैं।
जिसके कारण परिवार को उनके विवाह करने की जानकारी हो जाती है और अंतत: उनका विवाह मुश्किल में पड़ जाता है। याचिका में कहा गया की इस तरह घर पर नोटिस भेजने का कोई प्रावधान विशेष विवाह अधिनियम में नहीं है। ऐसे में विवाह अधिकारियों की ओर से की जा रही इस कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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हाइकोर्ट ने प्रदेश के सभी विवाह अधिकारियों को कहा है कि वे विवाह के लिए आवेदन करने वालों के घर ऐसा कोई नोटिस नहीं भेजे। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश कुलदीपसिंह मीणा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि परिवारजनों की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण लड़के-लडकियां विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह करते हैं। वयस्क जोड़े की ओर से इसके लिए विवाह अधिकारी के समक्ष आवेदन किया जाता है। वहीं विवाह अधिकारी संबंधित थानाधिकारी के जरिये लड़के और लड़की के निवास स्थान पर नोटिस भेज देते हैं।
जिसके कारण परिवार को उनके विवाह करने की जानकारी हो जाती है और अंतत: उनका विवाह मुश्किल में पड़ जाता है। याचिका में कहा गया की इस तरह घर पर नोटिस भेजने का कोई प्रावधान विशेष विवाह अधिनियम में नहीं है। ऐसे में विवाह अधिकारियों की ओर से की जा रही इस कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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नोटिस भेजने पर दी ये सफाई
इसका विरोध करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता धर्मवीर ठोलीया ने कहा की युगल के घर नोटिस भेजने का कारण उनके परिवार को होने जा रहे विवाह की जानकारी देना नहीं है। विवाह कराने से पहले जानना जरूरी है कि दोनों में से कोई पहले से विवाहित तो नहीं है। इसके अलावा कहीं फर्जी दस्तावेज तो पेश नहीं किए गए हैं। यदि इनकी जानकारी करे बिना विवाह कराया जाता है तो बाद में कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इन जटिलताओं से दोनों पक्षों को बचाने के लिए पुलिस के जरिए सत्यापन कराया जाता है।