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Doctor's Strike: हड़ताली डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने के ट्रिब्यूनल ने दिए आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 26 Dec 2017 09:29 PM IST
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राजस्थान में हड़ताली डॉक्टरों का नेतृत्व कर रहे डॉ. अजय चौधरी को राजस्थान सिविल सर्विस अपीलेंट ट्रिब्यूनल ने बड़ा झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने चौधरी को 29 दिसंबर तक ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश दिए है।
राजस्थान सिविल सर्विस अपीलांट ट्रिब्यूनल ने सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी की तबादला संबंधी याचिका को दो लाख की कॉस्ट के साथ खारिज करते हुए 29 दिसंबर तक ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश दिए हैं। साथ ही ट्रिब्यूनल ने अपने निर्देशों में यह भी कहा कि हड़ताल के दौरान करीब तीन सौ लोगों की मौत हुई है, सरकार इसके लिए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कारवाई करें।
वहीं इन चिकित्सकों को उकसाने के लिए जिम्मेदार अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी के खिलाफ भी तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
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राजस्थान सिविल सर्विस अपीलांट ट्रिब्यूनल ने सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी की तबादला संबंधी याचिका को दो लाख की कॉस्ट के साथ खारिज करते हुए 29 दिसंबर तक ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश दिए हैं। साथ ही ट्रिब्यूनल ने अपने निर्देशों में यह भी कहा कि हड़ताल के दौरान करीब तीन सौ लोगों की मौत हुई है, सरकार इसके लिए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कारवाई करें।
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वहीं इन चिकित्सकों को उकसाने के लिए जिम्मेदार अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी के खिलाफ भी तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
स्थानांतरण सही और विधिसम्मत है
Doctor
सरकार की ओर से अधिवक्ता मुकुल सिंघवी ने बहस करते हुए पक्ष रखा कि सरकार ने प्रार्थी का बिल्कुल सही स्थानांतरण किया है और यह विधिसम्मत है। प्रार्थी पिछले पांच साल से एक ही जगह पर कार्यरत थे। प्रशासनिक कार्यों के लिहाज से तबादला किया गया है, जो कि एक रूटीन प्रक्रिया है। इसमें किसी तरह की सरकार की कोई द्वेषभावना नहीं है।
प्रार्थी की ओर से तबादला का विरोध किया गया है। उनका कहना था कि द्वेष भावना से सरकार ने प्रार्थी व अन्य का तबादला किया गया है। इसलिए तबादला आदेश को निरस्त किया जाए। गत 14 दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद ट्रिब्यूनल ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। श्रवण साहनी व बन्नालाल की पीठ ने आज दो लाख की कॉस्ट के साथ याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने यह कॉस्ट प्रार्थी के अगले छह महीने से वेतन से वसूलने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने प्रार्थी को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत 29 दिसंबर तक अपनी ड्यूटी ज्वाइन करें।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में भी चुनौती दी थी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली थी। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के समक्ष जल्द फैसला कराने के लिए प्रार्थना पत्र पेश करने के निर्देश के साथ याचिका को निस्तारित कर दिया था।
प्रार्थी की ओर से तबादला का विरोध किया गया है। उनका कहना था कि द्वेष भावना से सरकार ने प्रार्थी व अन्य का तबादला किया गया है। इसलिए तबादला आदेश को निरस्त किया जाए। गत 14 दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद ट्रिब्यूनल ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। श्रवण साहनी व बन्नालाल की पीठ ने आज दो लाख की कॉस्ट के साथ याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने यह कॉस्ट प्रार्थी के अगले छह महीने से वेतन से वसूलने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने प्रार्थी को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत 29 दिसंबर तक अपनी ड्यूटी ज्वाइन करें।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में भी चुनौती दी थी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली थी। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के समक्ष जल्द फैसला कराने के लिए प्रार्थना पत्र पेश करने के निर्देश के साथ याचिका को निस्तारित कर दिया था।