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केवल 1 ग्राम हीमोग्लोबिन! डॉक्टर हैरान, आखिर कैसे जिन्दा है ये
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 15 Aug 2017 01:31 PM IST
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देवा पत्नी जीवा
- फोटो : अमर उजाला
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ये कुदरत का अजूबा है या कुछ और कि इस महिला के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा केवल एक ग्राम प्रति डेसीलीटर है। फिर भी ये जिंदा है। जी हां, ये बिल्कुल सच है और इस घटना ने डॉक्टरों को हैरान किया हुआ है।
ये हैरत कर देने वाला ये अनूठा मामला राजस्थान के उदयपुर संभाग के आदिवासी बहुल जिले बांसवाड़ा से सामने आया है। जहां चिकित्सा इसे विज्ञान के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं, वहीं लोग इसे कुदरत का अजूबा मान रहे हैं।
बांसवाड़ा जिले के घाटोल उपखण्ड क्षेत्र के आमलीवाटा गांव निवासी महिला देवा पत्नी जीवा के शरीर में दौड़ रहे खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा केवल एक ग्राम प्रति डेसीलीटर है। सभी को चकित कर डालने वाली ये जानकारी तब मिली जब गत दिनों उसे बुखार आने पर बांसवाड़ा जिला मुख्यालय के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले की बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के लेब इन्चार्ज शरद त्रिवेदी ने भी पुष्टि की है।
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डॉक्टर तो ब्लड रिपोर्ट आते ही चौंक गए और उन्हें ये विश्वास ही नहीं हुआ कि इतने कम हीमोग्लोबिन की मात्रा पर भी कोई जिंदा रह सकता है। लेकिन ये मरीज जिंदा है और डॉक्टर गहन जांच में जुटे हुए हैं।
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ये हैरत कर देने वाला ये अनूठा मामला राजस्थान के उदयपुर संभाग के आदिवासी बहुल जिले बांसवाड़ा से सामने आया है। जहां चिकित्सा इसे विज्ञान के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं, वहीं लोग इसे कुदरत का अजूबा मान रहे हैं।
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बांसवाड़ा जिले के घाटोल उपखण्ड क्षेत्र के आमलीवाटा गांव निवासी महिला देवा पत्नी जीवा के शरीर में दौड़ रहे खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा केवल एक ग्राम प्रति डेसीलीटर है। सभी को चकित कर डालने वाली ये जानकारी तब मिली जब गत दिनों उसे बुखार आने पर बांसवाड़ा जिला मुख्यालय के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले की बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के लेब इन्चार्ज शरद त्रिवेदी ने भी पुष्टि की है।
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डॉक्टर तो ब्लड रिपोर्ट आते ही चौंक गए और उन्हें ये विश्वास ही नहीं हुआ कि इतने कम हीमोग्लोबिन की मात्रा पर भी कोई जिंदा रह सकता है। लेकिन ये मरीज जिंदा है और डॉक्टर गहन जांच में जुटे हुए हैं।
अबुझ पहेली, नहीं उतर रही गले, इसके बीच होनी चाहिए हीमोग्लोबिन की मात्रा
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- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर इस घटना को चिकित्सा विज्ञान के लिए अबूझ पहेली के रूप में देख रहे हैं और आपस में बस इसी मरीज की चर्चा कर रहे हैं। जब डॉक्टरों ने देवा पत्नी जीवा की ब्लड रिपोर्ट करवाई तो रिपोर्ट आने पर उनके होश फाख्ता हो गए।
डॉक्टरों के यूं चौकने से मरीज के परिजनों के भी परेशान हो गए हैं। देवा के शरीर में एक ग्राम से भी कम खून होने का तथ्य चिकित्सकों के गले नहीं उतर रहा है और वे आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है। इस संबंध में चिकित्सकों ने लैब इंचार्ज से भी बात की है।
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के लेब इन्चार्ज शरद त्रिवेदी के अनुसार बांसवाड़ा जिले के घाटोल उपखण्ड क्षेत्र के आमलीवाटा गांव निवासी महिला देवा पत्नी जीवा नामक एक महिला भर्ती है। इसका हिमोग्लोबिन एक ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम आ रहा है। इतना कम होने पर भी रोगी जिन्दा है। सामान्य महिला का हिमोग्लोबिन 12 से 18 ग्राम प्रति डेसी लीटर होना चाहिए। आठ ग्राम से कम होने पर उसे एनिमिक माना जाता है।
डॉक्टरों के यूं चौकने से मरीज के परिजनों के भी परेशान हो गए हैं। देवा के शरीर में एक ग्राम से भी कम खून होने का तथ्य चिकित्सकों के गले नहीं उतर रहा है और वे आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है। इस संबंध में चिकित्सकों ने लैब इंचार्ज से भी बात की है।
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के लेब इन्चार्ज शरद त्रिवेदी के अनुसार बांसवाड़ा जिले के घाटोल उपखण्ड क्षेत्र के आमलीवाटा गांव निवासी महिला देवा पत्नी जीवा नामक एक महिला भर्ती है। इसका हिमोग्लोबिन एक ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम आ रहा है। इतना कम होने पर भी रोगी जिन्दा है। सामान्य महिला का हिमोग्लोबिन 12 से 18 ग्राम प्रति डेसी लीटर होना चाहिए। आठ ग्राम से कम होने पर उसे एनिमिक माना जाता है।