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कहां गुम हो गए सरकारी चिकित्सक, सरकार परेशान
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 07 Mar 2017 03:03 PM IST
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चिकित्सक
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राजस्थान में चिकित्सा विभाग के सामने अजीबो—गरीब संकट खड़ा है। विभाग के नवनियुक्त 229 से चिकित्सक गायब हो गए हैं। दरअसल मामला यह है कि विभाग ने करीब एक माह पूर्व इन मेडिकल आॅफिसर्स की नियुक्ति की थी। लेकिन एक माह बीतने के बाद भी ये आॅफिसर अभी तक नियुक्ति वालों स्थानों पर नहीं पहुंचे हैं। अब विभाग के सामने परेशानी यह है कि इन्हें नौकरी से बर्खास्त भी नहीं किया जा सकता है।
राजस्थान सेवा नियम के मुताबिक जब तक कर्मचारी एक वर्ष तक नौकरी पर नहीं आए उसे बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। राज्य में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में चिकित्सकों के 3025 पद खाली है। इसके लिए सरकार ने हाल ही में 684 चिकित्सकों की भर्ती की थी, जिसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। नवनियुक्त होने वाले मेडिकल आॅफिसरों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व जिला अस्पतालों में नियुक्त किया जाना है।
अब विभाग के सामने समस्या यह है कि जब तक नियुक्त चिकित्सकों को बर्खास्त नहीं किया जाता उनके स्थान पर नई भर्ती नहीं की जा सकती। वहीं कई विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जो नव नियुक्त चिकित्सक तय स्थानों पर नहीं पहुंचते वे पोस्ट ग्रेज्यूएशन की तैयारियों में लगे रहते हैं। यदि वे पास हो जाते हैं और मनचाही ब्रांच मिल जाती है तो वे नौकरी से इस्तीफा दे देते है, नहीं तो छुट्टी की अर्जी लेकर कई माह बाद वापस आ जाते है। चूंकि चिकित्सकों की कमी है इसलिए सरकार या विभाग भी इनके खिलाफ कोई अनुशासात्मक कार्रवाई करने से बचते है।
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राजस्थान सेवा नियम के मुताबिक जब तक कर्मचारी एक वर्ष तक नौकरी पर नहीं आए उसे बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। राज्य में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में चिकित्सकों के 3025 पद खाली है। इसके लिए सरकार ने हाल ही में 684 चिकित्सकों की भर्ती की थी, जिसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। नवनियुक्त होने वाले मेडिकल आॅफिसरों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व जिला अस्पतालों में नियुक्त किया जाना है।
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अब विभाग के सामने समस्या यह है कि जब तक नियुक्त चिकित्सकों को बर्खास्त नहीं किया जाता उनके स्थान पर नई भर्ती नहीं की जा सकती। वहीं कई विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जो नव नियुक्त चिकित्सक तय स्थानों पर नहीं पहुंचते वे पोस्ट ग्रेज्यूएशन की तैयारियों में लगे रहते हैं। यदि वे पास हो जाते हैं और मनचाही ब्रांच मिल जाती है तो वे नौकरी से इस्तीफा दे देते है, नहीं तो छुट्टी की अर्जी लेकर कई माह बाद वापस आ जाते है। चूंकि चिकित्सकों की कमी है इसलिए सरकार या विभाग भी इनके खिलाफ कोई अनुशासात्मक कार्रवाई करने से बचते है।
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