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Rajasthan: कोविड जांच में प्रोटेक्शन चार्ज के रूप में अवैध वसूली पर जुर्माना, हर्जाना ब्याज सहित लौटाना होगा

Sun, 01 Jan 2023 10:32 AM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Sun, 01 Jan 2023 10:32 AM IST
सार

जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर प्रथम ने एक डायग्नॉस्टिक सेंटर पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने कहा कि डायग्नॉस्टिक सेंटर की ओर से प्रोटेक्शन शुल्क के नाम पर वसूली एक अफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। 

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Diagnostic center fined for illegal collection as protection charge in Covid test
कोर्ट का फैसला - फोटो : Social Media

विस्तार

जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर प्रथम ने एक मामले में कोविड जांच शुल्क के साथ प्रोटेक्शन चार्ज वसूली को अनफेयर प्रैक्टिस करार दिया है। आयोग ने ओके डायग्नॉस्टिक टोंक रोड पर 9 प्रतिशत ब्याज सहित 10 हजार का हर्जाना लगाया है। डायग्नॉस्टिक को पैसे वापसी के आदेश जारी किए हैं।

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राजस्थान उपभोक्ता संरक्षण समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष एडवोकेट नरेश गोयल की याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। कोरोना काल में तन्मय गोयल और उनकी बहन तन्वी गोयल ने 29 नवंबर 2020 को ओके डायग्नॉस्टिक सेंटर पर कारोना संक्रमण की संभावना को देखते हुए HRCTC  चेस्ट टेस्ट  करवाया था। ओके डायग्नॉस्टिक सेंटर ने टेस्ट शुल्क 1700 रुपये और 200 रुपये प्रति व्यक्ति कोविड प्रोटेक्शन शुल्क के रूप मै वसूले थे। 

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इस प्रोटेक्शन शुल्क वसूली के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में चुनौती देते हुए कहा कि इस दौरान उनके हाथ को सैनिटाइज करवाने और एक पतली थैली को टेस्ट के दौरान काम में लिया गया था। जबकि कोरोना गाइडलाइन के अनुसार सभी सुरक्षा व्यवस्था निशुल्क रखनी थी। इसलिए डायग्नॉस्टिक सेंटर की ओर से प्रोटेक्शन शुल्क के नाम पर वसूली एक अफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। 

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उपभोक्ता को अधिकारों की जानकारी नहीं होना समस्या
राजस्थान उपभोक्ता संरक्षण समिति के अध्यक्ष नरेश गोयल ने बताया कि उपभोक्ता को उनके अधिकारों कि जानकारी नहीं होना ही उनके लिए सबसे बड़ी समस्या है। गोयल ने बताया कि राजस्थान में 16 दिसंबर 2020 को राजस्थान विधानसभा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348 की तीन कि शक्तियों का प्रयोग करते हुए गजट नोटिफिकेशन के द्वारा राजस्थान महामारी अध्यादेश जारी किया। जिसमें प्रदेश के अंदर कारोना  के बढ़ते मामलों और उससे बचाव एवं उपचार के बारे में लिखा गया है।


गोयल ने बताया कि इसी राजस्थान महामारी अध्यादेश 2020 कि धारा 4 का उपयोग करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव अखिल अरोरा  ने कोविड के अंदर कराये जाने वाले विभिन्न प्रकार कि जांचों की कीमत निर्धारित की, जो पहले से ही आसमान छू रही थी। इसको लेकर आदेश भी जारी हुए थे कि तय कीमत से ज्यादा वसूली करने पर करवाई कि जाएगी। जिसमें धारा 5 के तहत करवाई जिसमें 20 हजार का जुर्माना और 2 साल की कैद का भी प्रावधान या दोनों की व्यवस्था है।  


अधिक वसूली को लेकर सरकार करे जांच

एडवोकेट गोयल का कहना है कि जब माननीय आयोग ने परिवादी से अधिक राशि वसूली पर अपना निर्णय दिया है तो सरकार सेंटर और इसे अस्पतालों के खिलाफ जांच और करवाई करे। जिन्होंने लाखों लोगों के साथ  जांच के नाम पर ज्यादा वसूली कर नियमों का मजाक बनाया है।

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