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रिश्वत में अस्मत मांगने वाले थानेदार को जेल, कमिश्नर ने पत्र में यह लिखा

Fri, 16 Jun 2017 09:07 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Fri, 16 Jun 2017 09:07 PM IST
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The trap sho in bribe case sent to judicial custody in jodhpur
demo pic - फोटो : अमर उजाला
एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार एक आरोपी की मदद के लिए उसकी पत्नी से रिश्वत की एवज में अस्मत मांगने के मामले में आरोपी राजीव गांधी नगर थाने के निलम्बित थाना प्रभारी कमलदान चारण को एसीबी ने शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
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एसीबी ने आरोपी कमलदान सिंह को दो दिन के रिमांड पर लिया था। शुक्रवार को रिमांड अवधि पूरी होने पर उसे एसीबी के उपाधीक्षक जगदीश सोनी ने कोर्ट में पेश किया था। जहां से उसे 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए। 
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एसीबी सूत्रों के मुताबिक आरोपी थानेदार कमलदान और अफीम के आरोपी की पत्नी की प्राइवेट व्हाट्सअप चैटिंग और बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग एसीबी जांच में सामने आई है। जिसमें थानेदार कमल दान ने परिवादी महिला से थोड़ा मोटा होने की वजह से स्लिम होने की सलाह दी थी। साथ ही उसने महिला से हमेशा के लिए रिश्ते बनाने के लिए जोर भी दिया। उसने महिला से प्रेम होने की बात कही। 
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बताया जा रहा है कि रिश्वत में अस्मत मांगने के आरोपी राजीव गांधी नगर थानाधिकारी कमलदान चारण ने एसीबी की रिकॉर्डिंग में खुद की आवाज होने से इनकार कर दिया है। अब एसीबी आवाज के नमूने की जांच के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। वहीं, जानकारी मिली है कि एक लाख रुपए की रिश्वत दिलाने में मध्यस्थता करने वाला रेस्टोरेंट संचालक ओंकार सिंह गायब हो गया है। एसीबी ने पूछताछ के लिए उससे सम्पर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वो नहीं मिला।


दूसरी तरफ, थानाप्रभारी के रिश्वत में अस्मत मांगने के मामले में ट्रेप होने पर जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ ने गुरुवार को तीनों पुलिस उपायुक्त, सभी एडीसीपी, एसीपी व थानाधिकारी के नाम एक पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने 30 अगस्त 2014 को जारी निर्देश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने यह भी माना कि यदि इन निर्देर्शों की पालना की होती तो इस प्रकार का दुष्कृत्य नहीं करते। इससे पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा में कमी हुई है। उन्होंने इसमें भी सकारात्मक यानि अच्छी बात बताई कि इस कृत्य से विभाग से गन्दगी तो बाहर हुई।
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