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राजस्थान विवि शिक्षक भर्ती मामले की जांच के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 13 Jun 2017 07:38 PM IST
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- फोटो : google
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शहर की निचली अदालत ने राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व सहायक प्रोफेसर भर्ती में हुई अनियमितता की जांच के लिए गांधीनगर थाना पुलिस को आदेश दिए हैं।
महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-2 ने यह आदेश सहायक प्रोफेसर महिपालसिंह की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। परिवाद में अधिवक्ता गोपाल ताखर ने बताया कि नवंबर 2012 में विवि ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के करीब 238 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। परिवाद में कहा गया कि भर्ती नियमों के विपरीत जाकर आरोपियों ने नियमों की गलत व्याख्या कर अभ्यर्थी के अकादमिक रिकॉर्ड तथा अनुसंधान निष्पादन के पचास फीसदी अंकों के स्थान पर मनमाने ढंग से अकादमिक रिकॉर्ड के तीस फीसदी व अनसंधान निष्पादन के लिए बीस फीसदी अंकों में विभाजित कर लिया। इसके अलावा आरोपियों ने अकादमिक रिकॉर्ड की जगह अकादमिक पृष्ठभूमि करते हुए शैक्षणिक योग्यता को अकादमिक पृष्ठभूमि मान लिया।
परिवाद में कहा गया कि विवि की सिंडिकेट द्वारा सहायक प्रोफेसर भर्ती के लिए कोई नियम नहीं बनाए गए, जबकि विधानसभा ने सिंडिकेट को भर्ती नियम बनाने के लिए अधिकृत कर रखा है, लेकिन भर्ती के लिए अलग से नियम नहीं बनाए गए। इसलिए यूजीसी की ओर से बनाए भर्ती नियमों के आधार पर सहायक प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया किया जाना जरूरी था।
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परिवाद में विवि के तत्कालीन कुलपति देवस्वरूप, तत्कालीन सिंडिकेट सदस्य और विधायक प्रतापसिंह खाचरियावास और रिता चौधरी सहित सिंडिकेट के सभी तत्कालीन सदस्यों के नव चयनीत शिक्षकों सहित कुल 414 आरोपी बनाए गए हैं। परिवाद पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गांधीनगर थाना पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं।
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महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-2 ने यह आदेश सहायक प्रोफेसर महिपालसिंह की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। परिवाद में अधिवक्ता गोपाल ताखर ने बताया कि नवंबर 2012 में विवि ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के करीब 238 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। परिवाद में कहा गया कि भर्ती नियमों के विपरीत जाकर आरोपियों ने नियमों की गलत व्याख्या कर अभ्यर्थी के अकादमिक रिकॉर्ड तथा अनुसंधान निष्पादन के पचास फीसदी अंकों के स्थान पर मनमाने ढंग से अकादमिक रिकॉर्ड के तीस फीसदी व अनसंधान निष्पादन के लिए बीस फीसदी अंकों में विभाजित कर लिया। इसके अलावा आरोपियों ने अकादमिक रिकॉर्ड की जगह अकादमिक पृष्ठभूमि करते हुए शैक्षणिक योग्यता को अकादमिक पृष्ठभूमि मान लिया।
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परिवाद में कहा गया कि विवि की सिंडिकेट द्वारा सहायक प्रोफेसर भर्ती के लिए कोई नियम नहीं बनाए गए, जबकि विधानसभा ने सिंडिकेट को भर्ती नियम बनाने के लिए अधिकृत कर रखा है, लेकिन भर्ती के लिए अलग से नियम नहीं बनाए गए। इसलिए यूजीसी की ओर से बनाए भर्ती नियमों के आधार पर सहायक प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया किया जाना जरूरी था।
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परिवाद में विवि के तत्कालीन कुलपति देवस्वरूप, तत्कालीन सिंडिकेट सदस्य और विधायक प्रतापसिंह खाचरियावास और रिता चौधरी सहित सिंडिकेट के सभी तत्कालीन सदस्यों के नव चयनीत शिक्षकों सहित कुल 414 आरोपी बनाए गए हैं। परिवाद पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गांधीनगर थाना पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं।