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सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 06 Jun 2017 06:58 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : Demo pic
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जोधपुर में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश महिला उत्पीड़न केसेज अदालत की पीठासीन अधिकारी शिवानी जौहरी भटनागर ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी विजय कुमार को आजीवन कारावास की सजा के आदेश दिये है।
अदालत ने आरोपी विजय कुमार को धारा 363,366,376जी,323 भादस में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व एक लाख रूपये के जुर्माने के आदेश दिये है। सरकार की ओर से लोक अभियोजक श्रवणसिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए बताया कि 25 फरवरी 2007 को परिवादी ने ओसियां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी सुभाष व विजय कुमार ने नाबालिग का अपहरण करते हुए दुष्कर्म किया।
इससे पहले कोर्ट ने केस में एक आरोपी सुभाष को सजा के आदेश साल 2010 में दिये थे। वहीं विजय कुमार ने अपनी उम्र को नाबालिग बताते हुए कोर्ट से राहत का प्रयास किया था। परिवादी व सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मामला ले जाया गया। जहां सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी विजय कुमार को बालिग मानते हुए दुष्कर्म का मामला विचरण करने के निर्देश दिये थे।
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सुप्रीम कोर्ट से मामला रिमांड होने के बाद 8 अप्रेल 2013 को यह मामला महिला उत्पीड़न केसेज अदालत में भेजा गया था। अभियोजन की ओर से आरोपी के खिलाफ कुल 18 गवाह पेश किये गये और ट्रायल चलाया गया। परिवादी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप चौधरी ने पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद आज अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा के आदेश दिये है।
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अदालत ने आरोपी विजय कुमार को धारा 363,366,376जी,323 भादस में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व एक लाख रूपये के जुर्माने के आदेश दिये है। सरकार की ओर से लोक अभियोजक श्रवणसिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए बताया कि 25 फरवरी 2007 को परिवादी ने ओसियां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी सुभाष व विजय कुमार ने नाबालिग का अपहरण करते हुए दुष्कर्म किया।
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इससे पहले कोर्ट ने केस में एक आरोपी सुभाष को सजा के आदेश साल 2010 में दिये थे। वहीं विजय कुमार ने अपनी उम्र को नाबालिग बताते हुए कोर्ट से राहत का प्रयास किया था। परिवादी व सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मामला ले जाया गया। जहां सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी विजय कुमार को बालिग मानते हुए दुष्कर्म का मामला विचरण करने के निर्देश दिये थे।
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सुप्रीम कोर्ट से मामला रिमांड होने के बाद 8 अप्रेल 2013 को यह मामला महिला उत्पीड़न केसेज अदालत में भेजा गया था। अभियोजन की ओर से आरोपी के खिलाफ कुल 18 गवाह पेश किये गये और ट्रायल चलाया गया। परिवादी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप चौधरी ने पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद आज अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा के आदेश दिये है।