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दुष्कर्म के आरोप में फंसे जैन मुनि, इस क्रांतिकारी संत ने कहा ये साधु नहीं पाखंडी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 15 Oct 2017 07:46 PM IST
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जैन मुनि
- फोटो : SELF
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सूरत में युवती से दुष्कर्म के आरोप में फंसे एक जैन मुनि को लेकर जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा साधु नहीं पाखंडी है।
गौरतलब है कि सूरत में पुलिस ने युवती से दुष्कर्म के आरोप में जैन मुनि आचार्य शांतिसागर महाराज को गिरफ्तार किया है। इस मामले में कड़वे प्रवचन देने वाले क्रांतिकारी जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने कहा कि सूरत में जैन मुनि पर दुष्कर्म का आरोप दुखद है।
इस तरह के जैन मुनि ने जैन धर्म के मुनियों की परंपरा को कलंकित किया है। यह मुनि का नहीं, पाखंडी का काम है। तरुण महाराज ने कहा है कि कुछ लोग धर्म की आड़ में अपने गोरखधंधे चला रहे है। जिसे किसी भी स्थिति में इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। यह बहुत बड़ी समस्या है।
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उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि हर तीसरा साधु भ्रष्ट है। बात जरा कड़वी थीं लेकिन जिस तरह से रोज घटनाएं आ रही है उससे समझ सकते है मेरा कितना कड़वा वचन है। मैं समझता हूं कि जो अन्तरंग से वैराग्य नहीं होते और केवल बाहर से साधु का चोला ओढ़ लेते है। वे लोग साधु के वेश में अपना गोरखधंधा चलाते है।
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गौरतलब है कि सूरत में पुलिस ने युवती से दुष्कर्म के आरोप में जैन मुनि आचार्य शांतिसागर महाराज को गिरफ्तार किया है। इस मामले में कड़वे प्रवचन देने वाले क्रांतिकारी जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने कहा कि सूरत में जैन मुनि पर दुष्कर्म का आरोप दुखद है।
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इस तरह के जैन मुनि ने जैन धर्म के मुनियों की परंपरा को कलंकित किया है। यह मुनि का नहीं, पाखंडी का काम है। तरुण महाराज ने कहा है कि कुछ लोग धर्म की आड़ में अपने गोरखधंधे चला रहे है। जिसे किसी भी स्थिति में इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। यह बहुत बड़ी समस्या है।
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उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि हर तीसरा साधु भ्रष्ट है। बात जरा कड़वी थीं लेकिन जिस तरह से रोज घटनाएं आ रही है उससे समझ सकते है मेरा कितना कड़वा वचन है। मैं समझता हूं कि जो अन्तरंग से वैराग्य नहीं होते और केवल बाहर से साधु का चोला ओढ़ लेते है। वे लोग साधु के वेश में अपना गोरखधंधा चलाते है।
और इस तरह के साधुओं की पहचान कर करें बहिष्कार
मुनि तरुण सागर
- फोटो : फाइल फोटो
तरुण मुनि ने कहा कि काम सबसे प्रबल शत्रु है इस जहां में सब कुछ जीता जा सकता है। लेकिन काम को जीतना बड़ा मुश्किल है। काम आंतरिक शत्रु है जो सबसे बड़े साधु को भी जमीन पर पटक देता है। जिसके वजह से वैराग्य और ज्ञान धरे के धरे रह जाते है। भगवान महावीर ने युवावस्था में ही काम रूपी शत्रु पर विजय पा ली थी। भीतर के शत्रु को विजय हासिल करने वाले को ही महावीर कहा जाता है।
इस तरह की घटनाएं समाज के लिए चिंता जनक है। इसकी वजह से युवा वर्ग धर्म से विमुख हो रहा है। उन्होंने कहा कि लादेन ने कुछ लोगों की हत्या की थी लेकिन इस तरह के बलात्कारी पाखंडी साधु करोडों लोगों की आस्था की हत्या करते है। समाज को विचार करना चाहिए और इस तरह के साधुओं की पहचान कर उनका बहिष्कार करना चाहिए।
इस तरह की घटनाएं समाज के लिए चिंता जनक है। इसकी वजह से युवा वर्ग धर्म से विमुख हो रहा है। उन्होंने कहा कि लादेन ने कुछ लोगों की हत्या की थी लेकिन इस तरह के बलात्कारी पाखंडी साधु करोडों लोगों की आस्था की हत्या करते है। समाज को विचार करना चाहिए और इस तरह के साधुओं की पहचान कर उनका बहिष्कार करना चाहिए।