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भंवरी हत्याकांड:छह साल से फरार इंद्रा की गिरफ्तारी के लिए एटीएस ने ऐसे रचे आॅपरेशन

Sun, 04 Jun 2017 08:28 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Sun, 04 Jun 2017 08:28 PM IST
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Indira was absconding in Bhanwari murder case, these are operation by ATS
इंद्रा विश्नोई - फोटो : amar ujala
राजस्थान के चर्चित भंवरी देवी हत्याकांड मामले में अहम किरदार निभाने वाली इंद्रा विश्नोई। वारदात की ऐसी अहम सूत्रधार जिसकी सीबीआई पिछले करीब छह साल से तलाश कर रही थी। पकड़वाने के लिए इंद्रा पर पांच लाख रुपए का मोटा ईनाम भी रखा। लेकिन भगौड़ी इंदिरा सीबीआई की पकड़ से दूर रही।
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आखिरकार कानून के हाथ बहुत लंबे होते है और यह सफलता राजस्थान एटीएस के हाथ लगी। हम आपको बताते है इंद्रा को पकड़ने के लिए एटीएस ने दो आॅपरेशन रचे थे इनमें एक आॅपरेशन अशोक वाटिका और फिर आॅपरेशन माता हारी।
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इसकी इनसाइड स्टोरी के मुताबिक पिछले साल दिसंबर माह में एटीएस राजस्थान में तैनात एसपी विकास कुमार को एक सूचना मिली कि भंवरी हत्याकांड में भगौड़ी घोषित इंद्रा विश्नोई भोपाल में देवास—हरदा के आसपास रह रही है। तब एटीएस के एडीजी उमेश मिश्रा ने आईजी बीजू जार्ज जोजफ, एसपी विकास कुमार के नेतृत्व में आॅपरेशन अशोक वाटिका रचा। जिसमें पांच टीमें गठित की गई। 
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इसके बाद शुरू हुआ ऑपरेशन का अगला हिस्सा

Indira was absconding in Bhanwari murder case, these are operation by ATS
राजस्थान का चर्चित भंवरी देवी हत्याकांड - फोटो : File photo
इनमें एक टीम के जिम्मे थी ग्राउंड इंटेलीजेंस की जिम्मेदारी। दूसरी टीम टेक्निकल एनालिसिस में जुटी। तीसरी टीम के पास कोड ब्रेक करने का अहम जिम्मा था। चौथी टीम के पास फाइनल आॅपरेशन करने और अंतिम टीम आपात परिस्थिति में बैकअप के तौर पर तैयार की गई।

देवास में इंदिरा को स्थानीय लोग मां के नाम से जानते थे। वह हरदा और झाड़पा की ढाणियों में अलग-अलग ठिकाने बदलकर रहती थी। वह अपने परिवार के संपर्क में थी। इसके लिए दो लोग सूचनाएं पहुंचा रहे थे। लेकिन यह आपसी बातचीत विभिन्न कोड्स में होती थी।

जैसे "पंडित जी ने कहा है कि बगिया से आज दो ही फूल तोड़ने हैं"। किचन में आज क्या बना है। बिजनेस के लिए बगिया के कितने फूल तोड़े। इनमें कुक, बाबा, पंडित, गुरु शब्दों का भी उपयोग हुआ। पंडित जी गंगा नहाने जा रहे हैं। कुक से कहना कि आज हलवा बनाना है।

कोडिंग के जरिए इन बातों को समझने में एटीएस टीम को डीकोड करने में करीब तीन से चार माह का वक्त लगा। इसके बाद शुरू हुआ ऑपरेशन का अगला हिस्सा। राजस्थान एटीएस के इंस्पेक्टर मनीष शर्मा और श्याम रत्नू समेत करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों की टीम हरदा के पास सादा वस्त्रों में रहकर इंदिरा और उसके सहयोगियों पर निगरानी रखने लगी।

 

.....यह माताजी कोई और नहीं बल्कि इंदिरा विश्नोई ही थी

Indira was absconding in Bhanwari murder case, these are operation by ATS
अहम किरदार निभाने वाली इंदिरा विश्नोई - फोटो : File photo
​इनमें इंस्पेक्टर मनीष शर्मा और श्याम रत्नू फेरीवाले बनकर हैंडीक्राफ्ट सामान बेचने लगे। ये लोग राजस्थानी हेंडीक्राफ्ट के सामान को ज्यादा कीमत में बेचते थे। तब वहां खरीदारी करने आई कुछ स्थानीय महिलाओं ने एक माताजी द्वारा राजस्थानी हैंडीक्राफ्ट का सामान सस्ते दामों में खरीदने की बात कही। तब दोनों इंस्पेक्टरों ने महिलाओं से माताजी से मिलवाने की बात कही। यह माताजी कोई और नहीं बल्कि इंद्रा विश्नोई ही थी। जिसकी सीबीआई को छह साल से तलाश थी। 

चार दिन पहले एटीएस को इंद्रा के बारे में बिल्कुल पुख्ता जानकारी मिल गई। तब एटीएस ने ऑपरेशन का नाम रखा आॅपरेशन माताहारी। इसके अंतिम चरण में करीब एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारियों की टीम रही। शुक्रवार को इंदिरा देवास में नर्मदा स्नान के लिए जा रही थी। तब ही टीम के साथी ने कोड वर्ड में कहा कि मगरमच्छ नदी से बाहर आ गया है यानी इंद्रा अपने मकान से बाहर आ गई है। तभी एटीएस की टीम ने देवास से करीब 20 किलोमीटर दूर इंद्रा को घेराबंदी कर गिरफ्त में ले लिया और इस तरह एटीएस ने आॅपरेशन अशोक वाटिका और माताहारी चलाकर इंद्रा विश्नोई को पकड़ा।
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