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मृत व्यक्ति को भी है न्याय का अधिकार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 26 May 2017 07:52 PM IST
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जयपुर शहर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-12 ने एक रिवीजन अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि यह तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं है कि परिवादी की मौत होने के कारण मामले की ट्रायल नहीं की जाए। मृत व्यक्ति को भी न्याय का अधिकार है। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत को आदेश दिए हैं कि वह जल्दी से जल्दी सभी जीवित गवाहों के आधार पर एक साल में मामला तय कर दे।
अदालत ने यह आदेश दिनेश अरोड़ा की ओर से दायर रिवीजन अर्जी को खारिज करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि परिवादी की एकमात्र कमजोरी उसका गरीब और वृद्ध होना था। पर्चा बयान के एक माह बाद उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई। जिसमें पुलिस ने एफआर लगा दी, जबकि दिनेश अरोड़ा की ओर से बाद में परिवादी के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में आरोप पत्र पेश कर दिया। मामले के अनुसार चतुर्भुज कुमावत ने ट्रोमा वार्ड में 9 मई 2001 को पर्चा बयान दिया था कि वह पेंटर का काम करता है।
खादी बोर्ड, बजाज नगर में काम करने का उसका 1808 रुपए का बिल बकाया था। बोर्ड के मार्केटिंग अफसर दिनेश अरोड़ा ने उसे केवल सौलह सौ रुपए का भुगतान किया। जिसके चलते झगड़ा होने पर अरोड़ा ने उसके साथ गंभीर मारपीट की। जिसकी रिपोर्ट बजाज नगर पुलिस ने 7 जून 2001 को दर्ज की। वहीं बाद में दिनेश अरोड़ा ने राजकार्य में बाधा को लेकर चतुर्भुज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने चतुर्भुज की रिपोर्ट पर अदालत में एफआर पेश कर दी। जिसके खिलाफ प्रोटेस्ट दायर करने पर अदालत ने दिनेश अरोड़ा के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया। इस आदेश को दिनेश ने रिविजन अर्जी में चुनौती दी।
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अदालत ने यह आदेश दिनेश अरोड़ा की ओर से दायर रिवीजन अर्जी को खारिज करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि परिवादी की एकमात्र कमजोरी उसका गरीब और वृद्ध होना था। पर्चा बयान के एक माह बाद उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई। जिसमें पुलिस ने एफआर लगा दी, जबकि दिनेश अरोड़ा की ओर से बाद में परिवादी के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में आरोप पत्र पेश कर दिया। मामले के अनुसार चतुर्भुज कुमावत ने ट्रोमा वार्ड में 9 मई 2001 को पर्चा बयान दिया था कि वह पेंटर का काम करता है।
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खादी बोर्ड, बजाज नगर में काम करने का उसका 1808 रुपए का बिल बकाया था। बोर्ड के मार्केटिंग अफसर दिनेश अरोड़ा ने उसे केवल सौलह सौ रुपए का भुगतान किया। जिसके चलते झगड़ा होने पर अरोड़ा ने उसके साथ गंभीर मारपीट की। जिसकी रिपोर्ट बजाज नगर पुलिस ने 7 जून 2001 को दर्ज की। वहीं बाद में दिनेश अरोड़ा ने राजकार्य में बाधा को लेकर चतुर्भुज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने चतुर्भुज की रिपोर्ट पर अदालत में एफआर पेश कर दी। जिसके खिलाफ प्रोटेस्ट दायर करने पर अदालत ने दिनेश अरोड़ा के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया। इस आदेश को दिनेश ने रिविजन अर्जी में चुनौती दी।
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