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आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे EX MLA को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 22 Aug 2017 07:53 PM IST
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- फोटो : google
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बहन के प्रेमी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे धौलपुर के पूर्व एमएलए बीएल कुशवाहा की सजा स्थगित करने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है।
अदालत ने इस संबंध में कुशवाहा की ओर से दायर स्टे प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश कैलाशचन्द्र शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश बीएल कुशवाहा की ओर से दायर आपराधिक अपील पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
मामले के अनुसार अपनी बहन के प्रेमी नरेश कुशवाहा की हत्या की साजिश रचने के मामले में निचली अदालत ने गत 8 दिसंबर को धौलपुर के तत्कालीन एमएलए बीएल कुशवाहा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ कुशवाहा की ओर से हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान कुशवाहा की ओर से प्रार्थना पत्र पेश कर गुहार की गई कि जब तक अपील का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए। जिसे खारिज करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है।
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अदालत ने इस संबंध में कुशवाहा की ओर से दायर स्टे प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश कैलाशचन्द्र शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश बीएल कुशवाहा की ओर से दायर आपराधिक अपील पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
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मामले के अनुसार अपनी बहन के प्रेमी नरेश कुशवाहा की हत्या की साजिश रचने के मामले में निचली अदालत ने गत 8 दिसंबर को धौलपुर के तत्कालीन एमएलए बीएल कुशवाहा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ कुशवाहा की ओर से हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान कुशवाहा की ओर से प्रार्थना पत्र पेश कर गुहार की गई कि जब तक अपील का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए। जिसे खारिज करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है।
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