{"_id":"58f8cf7c4f1c1b3f3b473f39","slug":"buffalo-is-not-giving-milk-how-to-install-the-installment","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहब! आप हमारी भैंस खोल ले जाओ...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहब! आप हमारी भैंस खोल ले जाओ...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 20 Apr 2017 08:58 PM IST
विज्ञापन
buffalo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भीलवाड़ा में इन दिनों भूमि विकास बैंक के कर्मचारियों के लिए लोन की किस्त उगाहना बड़ा भारी पड़ रहा है। इन बैंककर्मियों को तरह—तरह के बातें सुनने को मिल रही हैं।
मामले के तहत भूमि विकास बैंक भीलवाड़ा ने वर्ष 2016—17 में किसानों को करीब 57 लाख रुपए का लोन दिया था। यह लोन किसानों को गाय, भैंस, बकरियां और ऊंट खरीदने के लिए दिया जाता है। अब बैंककर्मियों के सामने मुसीबत यह है कि उन्हें 30 जून से पहले इस लोन की उगाही करनी है, लेकिन हकीकत किस्तों में ही उलझी हुई है। कई ग्रामीणों की किस्तें ही लगातार बैंक को नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में बैंककर्मी गठीला गांव में किस्त मांगने के लिए गए तो उन्हें जवाब मिल रहा है कि साहब, भैंस दूध ही नहीं दे रही कहां से किस्त दें।
यही नहीं, कोई कह रहा है कि पशु अभी ब्याहया नहीं है जब ब्याहेगा तो दूध देगा, तब जाकर दूध बेचकर आपकी किस्त चुकाएंगे। इस तरह की परिस्थितियां बताकर ग्रामीण बैंक की किस्त नहीं दे रहे हैं। ज्यादा बोलने पर लोनधारकों से यह भी सुनने को मिलता है कि ज्यादा जल्दी हो तो पशु को ले जाओ।
विज्ञापन
बैंक कर्मियों का कहना है कि उनकी मुसीबत ये है कि जमीन या किसी वाहन पर लोन देने में तो उन्हें जब्त करके ही लोन का पैसा वसूल कर लें, लेकिन गाय—भैंस का उठाकर कहां लेकर जाएं। क्योंकि इनको रखने के लिए तो बैंक के पास जगह भी नहीं है।
उधर, इस सम्बंध में भूमि विकास बैंक के सचिव जीएल गुप्ता का कहना है कि अब ऐसे हालात में तो पशुओं पर दिए जाने वाला लोन बंद ही करना पड़ेगा।
विज्ञापन
मामले के तहत भूमि विकास बैंक भीलवाड़ा ने वर्ष 2016—17 में किसानों को करीब 57 लाख रुपए का लोन दिया था। यह लोन किसानों को गाय, भैंस, बकरियां और ऊंट खरीदने के लिए दिया जाता है। अब बैंककर्मियों के सामने मुसीबत यह है कि उन्हें 30 जून से पहले इस लोन की उगाही करनी है, लेकिन हकीकत किस्तों में ही उलझी हुई है। कई ग्रामीणों की किस्तें ही लगातार बैंक को नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में बैंककर्मी गठीला गांव में किस्त मांगने के लिए गए तो उन्हें जवाब मिल रहा है कि साहब, भैंस दूध ही नहीं दे रही कहां से किस्त दें।
विज्ञापन
यही नहीं, कोई कह रहा है कि पशु अभी ब्याहया नहीं है जब ब्याहेगा तो दूध देगा, तब जाकर दूध बेचकर आपकी किस्त चुकाएंगे। इस तरह की परिस्थितियां बताकर ग्रामीण बैंक की किस्त नहीं दे रहे हैं। ज्यादा बोलने पर लोनधारकों से यह भी सुनने को मिलता है कि ज्यादा जल्दी हो तो पशु को ले जाओ।
विज्ञापन
बैंक कर्मियों का कहना है कि उनकी मुसीबत ये है कि जमीन या किसी वाहन पर लोन देने में तो उन्हें जब्त करके ही लोन का पैसा वसूल कर लें, लेकिन गाय—भैंस का उठाकर कहां लेकर जाएं। क्योंकि इनको रखने के लिए तो बैंक के पास जगह भी नहीं है।
उधर, इस सम्बंध में भूमि विकास बैंक के सचिव जीएल गुप्ता का कहना है कि अब ऐसे हालात में तो पशुओं पर दिए जाने वाला लोन बंद ही करना पड़ेगा।