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Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Baba Ramdev filed a petition in the Rajasthan HighCourt against FIR

बाबा रामदेव के खिलाफ FIR, गिरफ्तारी से बचने के लिए पहुंचे हाईकोर्ट

Fri, 02 Feb 2018 07:03 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 02 Feb 2018 07:03 PM IST
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Baba Ramdev filed a petition in the Rajasthan HighCourt against FIR
baba ramdev
राजस्थान में एफआईआर दर्ज होने पर बाबा रामदेव ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। हाईकोर्ट ने आज पूरे मामले में सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर निवासी एसके. सिंह और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि जालुपुरा थाने में बाबा रामदेव सहित अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर को क्यों न रद्द कर दें। इसके साथ ही अदालत ने जवाब पेश करने के लिए 20 मार्च का समय दिया है।
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न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश रामकिशन यादव उर्फ बाबा रामदेव व आचार्य बालकिशन सहित आस्था चैनल की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। मामले के अनुसार एसके. सिंह ने गत दिनों जालुपुरा थाने में इस्तगासे से रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पतंजलि के एक बिस्कुट को सौ फीसदी आटा होने और मैदा का इस्तेमाल नहीं करने का दावा करते हुए बेचा जा रहा है। इसका विज्ञापन आस्था चैनल पर दिखाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।
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बिस्कुट की शुद्धता जांच के लिए इसकी प्रयोगशाला में जांच कराई गई। जिसमें इसका सेंपल मिसमेच निकला। जिस पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत बाबा रामदेव सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया।

बाबा रामदेव ने याचिका में बताया ये

Baba Ramdev filed a petition in the Rajasthan HighCourt against FIR
याचिका में एफआईआर को चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता की विश्वस्तर पर प्रतिष्ठा है। प्रयोगशाला से मिली रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि नमूने में मैदा की मात्रा कितनी है। याचिका में यह भी कहा गया कि बिस्कुट बनाने के लिए आटे में अन्य सामग्री भी डाली जाती है।

इसके अलावा यदि कोई मामूली अपराध भी बनता है तो वह आईपीसी का ना होकर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनता है। जिसके लिए एफआईआर दर्ज कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। शिकायतकर्ता ने जानबूझकर उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए एफआईआर दर्ज कराई है। ऐसे में एफआईआर को रद्द किया जाए।

जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने शिकायतकर्ता व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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